पंतनगर विश्वविद्यालय में मंगलवार को 37वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में कुल 1395 विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों में डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 731 छात्र और 664 छात्राएं शामिल रहीं। साथ ही 36 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। सर्वोत्तम स्नातक के रूप में जयश्री रॉय को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया, जबकि कई अन्य विद्यार्थियों को कुलपति स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक से नवाजा गया। समारोह में राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर राज्य के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी तथा नैनीताल के सांसद अजय भट्ट विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने की।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने दीक्षांत को जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में एक नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और साइबर तकनीक जैसी आधुनिक तकनीकों ने विश्व को तेजी से बदल दिया है। ऐसे में युवाओं को इन परिवर्तनों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे नौकरी की तलाश करने के बजाय रोजगार सृजनकर्ता बनें और स्टार्टअप, एग्री-बिजनेस तथा फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभाएं।

राज्यपाल ने ‘लैब से लैंड’ और ‘फाइल से फील्ड’ की अवधारणा को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि शोध और नवाचार का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि पंतनगर के विद्यार्थी देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहे हैं और हरित क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान दे चुके हैं। उन्होंने संतुलित जीवनशैली, पोषण और स्वास्थ्य के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अपने संबोधन में पंतनगर विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि की आधारशिला बताते हुए कहा कि इसी संस्थान ने हरित क्रांति को नई दिशा दी। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित पंत धान, पंत गेहूं, पंत मक्का, पंत सरसों और पंत सोयाबीन जैसी उन्नत किस्मों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आज भी किसानों के लिए भरोसे का प्रतीक हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अब प्रयास यह है कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक सीधे खेतों तक पहुंचे। सांसद अजय भट्ट ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब आज के युवा ही देश का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को कृषि, जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सफलता के लिए अनुशासन, समय प्रबंधन और ईमानदारी को आवश्यक बताया।
कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पिछले 66 वर्षों में संस्थान ने 46 हजार से अधिक विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की है तथा 361 उन्नत कृषि तकनीकों का विकास किया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा तीन बार ‘सरदार पटेल आउटस्टैंडिंग इंस्टीट्यूशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय ने क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में 209वां स्थान प्राप्त किया। उन्होंने आगे बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में 324 शोध परियोजनाएं संचालित हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 83 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त 16 पेटेंट के लिए आवेदन किए गए, जिनमें से 9 को स्वीकृति मिल चुकी है। कृषि विस्तार कार्यक्रमों के तहत 50 हजार से अधिक किसानों को लाभान्वित किया गया है तथा 7 हजार क्विंटल बीज वितरित किए गए हैं।

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित विद्यार्थी बाजार का भी उद्घाटन किया गया। इसमें विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिनमें डेयरी उत्पाद, मिलेट आधारित खाद्य पदार्थ तथा अन्य कृषि उत्पाद शामिल थे। इस पहल को विद्यार्थियों में उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। समारोह के अंत में कुलसचिव डॉ. दीपा विनय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, संकाय सदस्य, अधिकारी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
मेधावियों ने बढ़ाया विश्वविद्यालय का गौरव

37वें दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया। सर्वोत्तम स्नातक के रूप में जयश्री रॉय को कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त 13 विद्यार्थियों को कुलपति स्वर्ण पदक, 12 को रजत पदक और 10 विद्यार्थियों को कांस्य पदक प्रदान किए गए। विभिन्न विशेष पुरस्कारों में दिव्या लिंगवाल को सरस्वती पांडा गोल्ड मेडल, संभावि झा को नागम्मा शांताबाई अवार्ड तथा पल्लवी शर्मा को डॉ. राम शिरोमणि तिवारी अवार्ड दिया गया। इसके अलावा पारस आर्या, सुमन दिव्यांशु और राजश्री वर्मा सहित कई छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
विद्यार्थी बाजार बना आकर्षण का केंद्र

दीक्षांत समारोह के साथ आयोजित विद्यार्थी बाजार इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसका उद्घाटन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह द्वारा किया गया। इस बाजार में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें डेयरी उत्पाद जैसे आइसक्रीम, पनीर, दही, घी, कुल्फी, मंडुआ लस्सी के साथ-साथ मीट एवं चिकन उत्पाद भी शामिल रहे। कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना और उनमें उद्यमिता की भावना विकसित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के आयोजन स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।










