प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के ताजा अंक में राष्ट्र को संबोधित करते हुए भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल भविष्य का एक व्यापक खाका पेश किया। चुनाव की व्यस्तताओं के बीच जनता से जुड़ने की खुशी साझा करते हुए उन्होंने देश की एक ऐसी बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि से अपनी बात शुरू की, जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर ले जाती है। प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ घोषणा की कि तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित भारत के पहले स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी का चरण सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। उन्होंने देशवासियों को तकनीकी बारीकी समझाते हुए बताया कि क्रिटिकलिटी वह महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ कोई रिएक्टर पहली बार स्व-संचालित परमाणु श्रृंखला प्रक्रिया शुरू करता है। यह रिएक्टर न केवल बिजली पैदा करेगा, बल्कि भविष्य के लिए नया ईंधन भी तैयार करेगा, जो इसे वैश्विक स्तर पर एक विशेष स्थान दिलाता है।
प्रधानमंत्री ने विज्ञान के साथ-साथ प्रकृति की अदृश्य शक्ति यानी पवन-शक्ति का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय प्राचीन ग्रंथों का उद्धरण देते हुए वायु को जीवन की ऊर्जा बताया और कहा कि आज यही शक्ति भारत के विकास की नई कहानी लिख रही है। भारत की पवन ऊर्जा क्षमता अब 56 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है जिससे हमारा देश दुनिया में चौथे स्थान पर आ गया है। प्रधानमंत्री ने गुजरात के कच्छ और पाटन जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया जो कभी रेगिस्तान थे लेकिन आज बड़े रिन्यूएबल एनर्जी पार्कों के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए केंद्र बन रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सौर और पवन ऊर्जा का विस्तार केवल पर्यावरण का विषय नहीं है, बल्कि यह भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का आधार है।

अध्यात्म और शांति की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बुद्ध पूर्णिमा की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लद्दाख के ड्रबपोन ओत्जर रिनपोचे के मार्गदर्शन में दक्षिण अमेरिका के चिली में चल रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे बुद्ध के विचार वैश्विक शांति का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक के कर्मा मोनेस्ट्री का उदाहरण दिया, जहाँ 100 एकड़ के वन क्षेत्र में सैकड़ों प्रजातियों के पेड़ों को संरक्षित किया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि बुद्ध का प्रकृति और शांति का संदेश आज के तनावपूर्ण वैश्विक परिवेश में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। इसी क्रम में उन्होंने दिल्ली में आयोजित बीटिंग रिट्रीट समारोह की चर्चा की और बताया कि पहली बार भारतीय सशस्त्र बलों का यह संगीत वेव्ज ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है जो हमारी गौरवशाली सैन्य परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाएगा।
प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों से वन्यजीव संरक्षण की प्रेरक कहानियाँ साझा कर समाज और प्रकृति के जुड़ाव पर जोर दिया। उन्होंने कच्छ के रण में फ्लेमिंगो पक्षियों के प्रति स्थानीय लोगों के प्रेम, उत्तर प्रदेश में हाथियों के साथ टकराव रोकने के लिए गज मित्र की पहल और छत्तीसगढ़ में काले हिरणों की वापसी का जिक्र किया। साथ ही, राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की पहचान माने जाने वाले ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए चल रहे वैज्ञानिक अभियानों की सफलता को एक बड़ी आशा बताया। उन्होंने उत्तर-पूर्व के बांस यानी बैम्बू सेक्टर की सफलता का विवरण देते हुए कहा कि साल 2017 में कानून बदलकर इसे पेड़ की श्रेणी से बाहर करने के बाद वहां आर्थिक क्रांति आ गई है। त्रिपुरा से लेकर नागालैंड और सिक्किम तक, स्वयं सहायता समूह बांस से फर्नीचर और हस्तशिल्प बनाकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

सूचना और शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया द्वारा साझा किए गए 20 करोड़ से अधिक डिजिटल दस्तावेजों की सराहना की। उन्होंने नागरिकों से वेबसाइट पर जाकर सातवीं शताब्दी की गिलगित पांडुलिपियों और रानी लक्ष्मीबाई के ऐतिहासिक पत्रों को देखने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने गणित के क्षेत्र में भारत की बेटियों की अंतरराष्ट्रीय सफलता पर गर्व जताया। फ्रांस में आयोजित यूरोपियन गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड में भारतीय टीम ने दुनिया में छठा स्थान हासिल किया, जिसमें श्रेया मुंधड़ा ने स्वर्ण, संजना चाको ने रजत और शिवानी भरत कुमार ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा।
संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने आगामी जनगणना 2027 के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह दुनिया की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जहां नागरिक स्वयं मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। यह प्रक्रिया गोपनीय और सुरक्षित होगी, जो भविष्य की योजनाओं के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। साथ ही, उन्होंने भारतीय खान-पान की विविधता और विशेष रूप से भारतीय चीज की वैश्विक सफलता पर चर्चा की। कश्मीर की कलारी, हिमालय की छुरपी और गुजरात के सुरती पनीर का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे लोकल से ग्लोबल होने का बेहतरीन उदाहरण बताया। अंत में, गुरुदेव टैगोर और 1857 के शहीदों को नमन करते हुए उन्होंने स्कूली बच्चों को छुट्टियों में नया सीखने और सभी देशवासियों को गर्मी में स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी।











