Uttarakhand Census : उत्तराखंड में जनगणना के पहले चरण यानी मकान सूचीकरण और मकान गणना का कार्य पूरा होने के बाद राज्य की आबादी, परिवारों और भवनों को लेकर अहम आंकड़े सामने आए हैं। शुरुआती अनुमान के मुताबिक पिछले 15 वर्षों में प्रदेश की आबादी में करीब 28 लाख की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही परिवारों और भवनों की संख्या में भी उल्लेखनीय इजाफा दर्ज किया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की कुल आबादी एक करोड़ 86 हजार थी। वहीं अब पहले चरण की गणना में जनगणना टीमों की पहुंच लगभग एक करोड़ 28 लाख लोगों तक हो चुकी है। हालांकि यह अभी प्रारंभिक आंकड़े हैं और अंतिम आधिकारिक रिपोर्ट बाद में जारी की जाएगी।
भवनों की संख्या में 12 लाख का इजाफा
मकान सूचीकरण के आंकड़ों से यह भी साफ हुआ है कि राज्य में भवनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2011 में प्रदेशभर में 33 लाख 83 हजार 410 भवन दर्ज किए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या बढ़कर करीब 45 लाख तक पहुंच गई है। यानी राज्य में लगभग 12 लाख नए भवन जुड़े हैं।

परिवारों की संख्या भी तेजी से बढ़ी
परिवारों की संख्या में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2011 में प्रदेश में 19 लाख 97 हजार 68 परिवार दर्ज किए गए थे। अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 28 लाख 30 हजार तक पहुंच गया है। यानी पिछले डेढ़ दशक में करीब आठ लाख नए परिवार जुड़े हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि शहरीकरण, पलायन और अलग परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
सितंबर में हिमाच्छादित क्षेत्रों में होगी अलग गणना
जनगणना विभाग प्रदेश के करीब 120 हिमाच्छादित क्षेत्रों में सितंबर महीने में विशेष जनगणना अभियान चलाएगा। विभाग के अनुसार सर्दियों के दौरान इन इलाकों से लोग अन्य स्थानों पर पलायन कर जाते हैं, इसलिए वहां पहले ही गणना कराई जाएगी। इसके बाद राज्य के बाकी हिस्सों में 10 फरवरी से 28 फरवरी के बीच जनगणना का दूसरा चरण एक साथ संचालित किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार पूरी जनगणना प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संपन्न कराई जाएगी।










