ऋषिकेश में आयोजित अखिल भारतीय महापौर परिषद की 117वीं कार्यकारी समिति की बैठक में CM धामी ने प्रतिभाग करते हुए 29.78 करोड़ की तीन विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें 23.15 करोड़ की एक योजना का लोकार्पण तथा 6.63 करोड़ की दो योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न परियोजना स्थलों का निरीक्षण भी किया। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के सभी मेयर अपने-अपने शहरों के प्रथम नागरिक होने के साथ-साथ जनता की आशाओं, अपेक्षाओं और विश्वास के प्रतिनिधि भी हैं। उन्होंने कहा कि उनके निर्णयों का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भारत की आत्मा गांवों में बसती है, वहीं नागरिकों के सपने, आकांक्षाएं और भविष्य की संभावनाएं शहरों में आकार लेती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है और उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण पल इस प्रदेश में बिताए हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस वर्ष चारधाम यात्रा के पहले 45 दिनों में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो एक नया रिकॉर्ड है। धामी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यात्रियों को सरल, सुगम और सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि पहले आदि कैलाश में जहां लगभग 500 श्रद्धालु पहुंचते थे, वहीं इस वर्ष प्रतिदिन करीब एक हजार श्रद्धालु वहां पहुंच रहे हैं। मां पूर्णागिरि मंदिर में भी अब तक 24 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले चार वर्षों में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक उत्तराखंड पहुंचे हैं।
शहरी विकास पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी ठोस कचरा प्रबंधन, सफाई व्यवस्था, अमृत मिशन, लीगेसी वेस्ट प्रबंधन और खुले में शौच मुक्त अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि शहरी गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में पहली बार नगर निकायों में अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा निराश्रित गोवंशों के संरक्षण के लिए आश्रय योजना तथा श्वानों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल योजना भी शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि हरित क्षेत्रों के विकास और प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।










