इंटरनेट पर अगर आप कुछ भी खंगालना शुरू करें तो असली और नकली के बीच की लकीर धुंधली होती नजर आती है। बड़े-बड़े दावों और तामझाम के साथ चैटबॉट्स, फोटो-वीडियो और म्यूजिक जनरेटर टूल्स लॉन्च करने वाली टेक कंपनियों के लिए अब अपना ही एआई कचरा जी का जंजाल बन चुका है। आलम यह है कि जो टूल्स कल तक यूजर का काम आसान करने के लिए बने थे आज वे ही इंटरनेट पर गैर-जरूरी कंटेंट का बोझ बढ़ा रहे हैं। इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी मेहनत के तैयार किए गए बेतुके गानों, अजीबोगरीब कुकिंग रेसिपीज और स्पैम वीडियोज की भरमार है। इस एआई कचरे से निपटने के लिए कंपनियों ने अब तक का सबसे बड़ा सफाई अभियान शुरू किया है।
जानिए क्या क्या हटाया गया
7.5 करोड़ एआई ट्रैक आउट: म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म स्पॉटिफाई ने महज एक साल के भीतर 7.5 करोड़ बल्क-अपलोड और एआई जनरेटेड गानों को डिलीट किया है।
1.30 लाख चैनल जब्त: यूट्यूब ने पिछले छह महीनों में एआई कचरा फैलाने वाले करीब 1.30 लाख अनावश्यक और स्पैम चैनलों को प्लेटफॉर्म से हटा दिया है।
शॉर्ट्स में 20% कचरा: एक अनुमान के मुताबिक, यूट्यूब पर परोसे जाने वाले कुल शॉर्ट वीडियोज में से 20% से अधिक हिस्सा विशुद्ध एआई जनरेटेड कचरे का है।
यूजर्स के हाथ में रिपोर्टिंग का चाबुक

कंटेंट की गुणवत्ता गिरती देख पिंटरेस्ट और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स ने यूजर्स को एआई कंटेंट को नियंत्रित और रिपोर्ट करने का सीधा विकल्प दे दिया है। वहीं, सबस्टैक जैसे राइटिंग प्लेटफार्म्स ने एआई डिटेक्शन टूल्स तैनात किए हैं ताकि कम गुणवत्ता वाले यूज एंड थ्रो कंटेंट को पहचानकर हटाया जा सके।
असली क्रिएटर्स पर मंडराया संकट
एआई के इस बेलगाम कचरे को रोकने के लिए टेक कंपनियां जिस तरह से अल्गोरिदम को सख्त कर रही हैं और कंटेंट की रीच सीमित कर रही हैं उससे असली मेहनत करने वाले ओरिजिनल क्रिएटर्स की पहुंच भी प्रभावित होने लगी है।










