Bihar Chunav के परिणाम ने एक बार फिर महिला वोटरों की ईमानदारी पर मुहर लगा दी। यह बात सिद्ध हो गई कि अगर उनके लिए कुछ किया जाएगा तो वह सरकारों को रिटर्न गिफ्ट देने में पीछे नहीं रहेंगी। पिछले कुछ चुनावों पर अगर ध्यान दें तो पाएंगे कि महिलाओं ने अपने विवेक से वोट किया है। अमूमन माना जाता रहा है कि महिलाएं परिवार, पति-पिता के कहने पर वोट दिया करती हैं। लेकिन, यह धारणा गलत साबित हो रही है। बिहार में एनडीए सरकार की वापसी में महिलाओं ने ही प्रमुख भूमिका निभाई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि 2027 में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार महिला केंद्रित योजनाओं को धार देकर क्या रिटर्न गिफ्ट ले पाती है? फिलहाल यह देखना काफी सुखद है कि अब चुनावों में आधी आबादी की ताकत नजर आने लगी है, पार्टियां उनको ध्यान में रखकर अपनी योजनाएं बनाने लगी हैं। आने वाले दिनों में तस्वीर और बदल सकती है। अगल चुनाव बंगाल में होना है। उसके बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में होना है। इन राज्यों का चुनाव पिछले चुनावों से भिन्न हो सकता है।
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने लाडली बहना योजना शुरू की। उस चुनाव में भी भाजपा ने जबरदस्त जीत हासिल की। इसके बाद महाराष्ट्र में भी शिंदे सरकार लाडली बहिन योजना पर फोकस किया। नतीजतन एनडीए को ऐतिहासिक जीत हासिल की। झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार ने मैया सम्मान योजना लेकर आई। भाजपा पूरी ताकत लगाने के बाद भी सत्ता में नहीं आ पाई। इससे यह साबित होता है कि महिलाएं ईमानदारी से वोट कर रही है। यानी, सरकार अगर उन्हें कुछ फायदा पहुंचा रही है तो वह वोट करने से पीछे नहीं हट रही हैं।
उत्तराखंड में महिलाओं के लिए योजनाएं
उत्तराखंड में महिलाओं के लिए कई योजनाएं हैं। जिनमें नंदा गौरा योजना (लड़कियों की शिक्षा और जन्म के लिए वित्तीय सहायता), मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (महिलाओं के रोजगार के लिए 10,000 की पहली किस्त और 2 लाख तक की अतिरिक्त सहायता) और मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना (अविवाहित, तलाकशुदा और निराश्रित महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना भी है। बिहार चुनाव के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि कुछ अन्य योजनाएं भी लॉन्च की जा सकती है।

बिहार चुनाव में महिला वोटरों के बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की वजह से चुनाव का रुख पूरी तरह बदल गया। इस बार के चुनाव में 71.6% महिलाओं ने मतदान किया, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत काफी कम रहा। इस बार केवल 62.8% पुरुषों ने मतदान किया। यानी 8.8% महिला वोटरों ने ज्यादा वोट डाला। बिहार में कुल 7.4 करोड़ वोटरों में महिला वोटरों की संख्या 3.51 करोड़ है। इसमें से बड़ी संख्या पहले से नीतीश कुमार को वोट देती आ रही है। नीतीश की ‘10 हजारी योजना’ से जब एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को पहली किस्त मिली तो महिलाओं का एक और बड़ा हिस्सा नीतीश कुमार के समर्थन में आ गया। दरअसल अगस्त में नीतीश कुमार ने ऐलान किया कि महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को व्यापार करने के लिए 10 हजार रुपये दिए जाएंगे।
सितंबर में महिलाओं के खाते में पहली किस्त भी डाल दी गई। नीतीश कुमार ने महिला रोजगार योजना के तहत 1.21 करोड़ महिलाओं (कुल महिला वोटरों का 35%) के खाते में 10 हजार की पहली किस्त भेजी, जिससे महिलाओं को ये भरोसा हो गया कि अगर चुनाव के बाद नीतीश कुमार की वापसी होती है तो महिलाओं को सरकार की तरफ से काफी आर्थिक लाभ मिलेगा। ऐसे में महिलाओं ने नीतीश कुमार के समर्थन में एनडीए को जमकर वोट डाला। महागठबंधन की तरफ से भी महिलाओं को 30 हजार रुपए देने का वादा तो किया गया लेकिन वो इसलिए बेअसर हो गया क्योंकि नीतीश कुमार ने पहले ही महिलाओं के खाते में पैसा डालकर उनका भरोसा जीत लिया। चुनाव से पहले ही नीतीश की तरफ से मिली 10 हजार की किस्त महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी साबित हुई और महागठबंधन ताकता ही रह गया।

बिहार में जीविका दीदी की संख्या एक करोड़ से ज्यादा
बिहार की महिला वोटरों को लुभाने में बीजेपी ने अपनी महिला टीम को जोर-शोर से काम करने के निर्देश दिए। बिहार में जीविका दीदियों की संख्या एक करोड़ से ज्यादा है। बिहार में बीजेपी की महिला टीमें इन दीदियों से मिलीं और उन्हें एनडीए सरकार के फायदे बताए। इसके अलावा महिलाओं के बीच पहुंच बनाने के लिए पूरे बिहार में आध्यात्मिक बैठक, शिव-चर्चा जैसे कार्यक्रम चलाए गए, जिससे ज्यादा से ज्यादा महिलाओं तक पहुंच को सुनिश्चित किया गया और आखिर में ये महिला वोटर एनडीए के लिए संजीवनी बूटी की तरह काम आईं। बिहार सरकार की तरफ से महिलाओं के हित में तमाम काम किए गए। इसमें आशा वर्करों की सैलरी बढ़ाना और ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी शामिल है। ऐसे में महिलाओं के बीच ये संदेश साफ हो गया कि नीतीश सरकार महिलाओं के हित में सोचती है और इसका एनडीए को फायदा मिला।










