उत्तराखंड की बद्री गाय के संरक्षण, संवर्धन एवं आनुवंशिक अपग्रेडेशन की दिशा में पंतनगर स्थित जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा आईसीएआर–राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) करनाल के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ओवम पिक-अप एवं इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (OPU-IVF) तकनीक से तैयार श्रेष्ठ बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय में प्रत्यारोपित किए जाने के बाद 11 सितंबर 2026 को सुबह 3:10 बजे एक स्वस्थ बद्री बछिया का जन्म हुआ।
इस उपलब्धि की विशेष बात यह है कि यह कार्यक्रम वर्ष 2023 में तत्कालीन कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान की पहल एवं नेतृत्व में प्रारंभ किया गया था। उनके नेतृत्व में Pantnagar University और एनडीआरआई, करनाल के बीच वैज्ञानिक सहयोग स्थापित कर बद्री गाय के श्रेष्ठ आनुवंशिक संसाधन के संरक्षण एवं तीव्र गुणन के लिए आधुनिक प्रजनन तकनीकों को विकसित करने की दिशा में कार्य शुरू किया गया। तीन वर्षों के निरंतर वैज्ञानिक प्रयासों के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है।
कैसे तैयार हुआ बद्री भ्रूण

परियोजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय की श्रेष्ठ बद्री गायों से OPU तकनीक द्वारा अंडाणु प्राप्त किए गए। इन्हें प्रयोगशाला में परिपक्व करने के बाद श्रेष्ठ बद्री सांड के वीर्य से IVF तकनीक द्वारा निषेचित किया गया। सात दिनों तक नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में भ्रूण विकसित किए गए और तत्पश्चात उन्हें विश्वविद्यालय के शिक्षण डेयरी फार्म की साहीवाल एवं क्रॉस ब्रीड गायों में प्रत्यारोपित किया गया।
इनमें से एक साहीवाल गाय ने सफलतापूर्वक बद्री नस्ल की स्वस्थ बछिया को जन्म दिया। एक अन्य क्रॉसब्रेड गाय के भी आगामी 5–7 दिनों में बद्री बछड़े को जन्म देने की संभावना है।
यह परियोजना उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, हल्दी के वित्तीय सहयोग से संचालित की जा रही है। वैज्ञानिक दल में पंतनगर विश्वविद्यालय के डा. शिव प्रसाद, डा. सुनील कुमार एवं डा. मृदुला शर्मा तथा एनडीआरआई, करनाल के डा. नरेश एल. सेलोकर एवं डा. एम.के. सिंह शामिल हैं। परियोजना में डा. संजय शर्मा, निदेशक, उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है।
क्लोनिंग पर भी चल रहा कार्य
इसी परियोजना के अंतर्गत श्रेष्ठ एवं अधिक दुग्ध उत्पादन वाली बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी कार्य किया जा रहा है। वैज्ञानिक दल ने बद्री गाय के क्लोन भ्रूण तैयार करने में सफलता प्राप्त की है। भविष्य में OPU-IVF एवं क्लोनिंग से तैयार भ्रूणों को अधिक संख्या में साहीवाल, क्रॉसब्रेड एवं बद्री गायों में प्रत्यारोपित करने की योजना है। इससे श्रेष्ठ आनुवंशिक गुणों वाली बद्री गायों के तीव्र गुणन में सहायता मिलेगी तथा उत्तराखंड की इस महत्वपूर्ण स्वदेशी नस्ल के संरक्षण एवं वैज्ञानिक नस्ल सुधार को नई गति मिल सकती है।
कुलपति ने वैज्ञानिकों को दी बधाई
इस उपलब्धि पर पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डा. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने शिक्षण डेयरी फार्म का दौरा कर वैज्ञानिक दल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बद्री गाय उत्तराखंड की महत्वपूर्ण स्वदेशी पशु आनुवंशिक संपदा है और इसके संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार के लिए आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे प्रयास भविष्य में पशुपालकों की आय बढ़ाने तथा उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. डी. कुमार ने भी वैज्ञानिक दल को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई दी। वैज्ञानिक दल ने इस सफलता के लिए तत्कालीन कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान की पहल एवं नेतृत्व, वर्तमान कुलपति डा. शिवेंद्र कुमार कश्यप के संस्थागत सहयोग, उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, विश्वविद्यालय प्रशासन, निदेशालय अनुसंधान तथा शिक्षण डेयरी फार्म के सहयोग एवं मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह उपलब्धि उत्तराखंड की बद्री गाय के संरक्षण और आनुवंशिक उन्नयन के लिए आधुनिक प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।











