कीमती धातुओं के बाजार में इस समय चांदी सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। रिकॉर्ड तेजी के बीच चांदी ने इस साल निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक चांदी की कीमत में करीब 84000 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। घरेलू सर्राफा बाजार में जहां साल के शुरुआती दिनों में चांदी करीब 2.39 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही थी, वहीं अब इसके दाम बढ़कर 3.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुके हैं। महज एक साल में करीब 35 प्रतिशत की यह छलांग चांदी के इतिहास में दुर्लभ मानी जा रही है।
औद्योगिक मांग ने बढ़ाई चांदी की चमक
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतों में आई इस जबरदस्त तेजी के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे बड़ा कारण चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऑटोमोबाइल सेक्टर में चांदी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ग्रीन एनर्जी की ओर दुनिया के बढ़ते रुझान ने चांदी की मांग को और मजबूत किया है। इसके साथ ही वैश्विक आपूर्ति में सीमितता भी कीमतों को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभा रही है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई की आशंका के बीच निवेशकों का रुझान तेजी से सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है। शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव और करेंसी में कमजोरी के चलते निवेशक सोना-चांदी को सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं। यही वजह है कि चांदी में निवेश लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
सोना भी पीछे नहीं, 15500 रुपये हुआ महंगा

चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी इस साल मजबूती बनी हुई है। वर्ष 2026 में अब तक सोना करीब 15500 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है, जो लगभग 11.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर पार कर चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की नीतियां, डॉलर में कमजोरी और आर्थिक सुस्ती की आशंका ने सोने को भी मजबूत सहारा दिया है।
विदेशी बाजारों में भी ऐतिहासिक उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। पहली बार सोने ने 4,700 डॉलर प्रति औंस का आंकड़ा पार किया है, जबकि चांदी 95 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई है। जानकारों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर सतर्क नीति और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से सोना चांदी को और मजबूती मिल सकती है।
महंगे दाम के बावजूद बनी हुई है मांग

कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद घरेलू बाजार में चांदी की मांग कमजोर नहीं पड़ी है। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार निवेशक बड़ी मात्रा में चांदी की बार और सिक्के खरीद रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी चांदी को पारंपरिक और सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जा रहा है। शादी-विवाह और धार्मिक अवसरों पर चांदी के आभूषणों की मांग बाजार को सहारा दे रही है।
आगे भी तेजी के संकेत, निवेश में सतर्कता जरूरी
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां मौजूदा रुख पर बनी रहीं तो आने वाले महीनों में सोना और चांदी दोनों में और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए संतुलित और सोच-समझकर निवेश करें।








