Warren Buffett’s Retirement : दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में से एक वॉरेन बफे ने 2025 के अंत के साथ अपनी कारोबारी पारी को भी विराम दे दिया। उन्होंने 31 दिसंबर को बर्कशायर हैथवे के सीईओ के तौर पर अपना पद छोड़ दिया। बफे ने कंपनी की सालाना शेयरधारकों की मीटिंग में अपने रिटायरमेंट की घोषणा की थी। बफे के रिटायरमेंट के बाद उनकी जगह कंपनी के वाइस चेयरमैन ग्रेग एबेल कंपनी का कामकाज संभालेंगे। वॉरेन बफे 95 साल के हो चुके हैं। इस उम्र में भी उन्होंने सिर्फ रोजाना के कामकाज से रिटायरमेंट लिया है, कंपनी से नहीं। उन्होंने कहा है कि वह 2026 में भी ऑफिस आते-जाते रहेंगे। साथ ही वह बोर्ड के चेयरमैन भी बने रहेंगे। पिछले कई दशकों में बर्कशायर ने अपने प्रदर्शन से एसएंडपी 500 इंडेक्स को लगातार पीछे छोड़ा है। इस सफर में वॉरेन बफे ने गीको और नेशनल इंडेम्निटी जैसी बीमा कंपनियों से लेकर इस्कर मेटलवर्किंग जैसी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को खरीदा। इसके अलावा डेरी क्वीन जैसे रिटेल ब्रांड, बड़ी यूटिलिटी कंपनियां और अमेरिका की सबसे बड़ी रेल नेटवर्क कंपनियों में से एक बीएनएसएफ रेलवे भी बर्कशायर का हिस्सा बनी। बफे ने समय-समय पर सैकड़ों अरब डॉलर के शेयरों की खरीद-बिक्री की और अमेरिकन एक्सप्रेस, कोका-कोला और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियों में लंबे समय तक निवेश करके जबरदस्त रिटर्न हासिल किया।
यह भी पढ़ें : स्टार्टअप की दुनिया में उत्तराखंड का डंका… केंद्र ने दिया लीडर राज्य का दर्जा
रिटायरमेंट के बाद की प्लानिंग
दुनिया के सबसे महानतम निवेशकों में गिने जाने वाले वॉरेन बफे का रिटायरमेंट प्लान भी तैयार है। बफे ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को दिए एक इंटरव्यू में अपने पोस्ट रिटायरमेंट प्लान को लेकर चर्चा की। उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि मैं घर पर बैठकर सीरियल नहीं देखूंगा। मेरी रुचियां अभी भी वही हैं। यानि कि वह रिटायरमेंट के बाद भी निवेश से जुड़े रहेंगे। बफे के लिए रिटायरमेंट का मतलब दूर हो जाना या दिमाग को आराम देना नहीं है। इसका मतलब है उत्सुक रहना, सक्रिय रहना और पूरी तरह से जुड़े रहना। उन्होंने कहा कि वह पहले जो किया करते थे, वही रिटायरमेंट के बाद भी करना पसंद करेंगे। उन्होंने साफ किया कि रिटायरमेंट के बाद भी वह ऑफिस आते-जाते रहेंगे। बफे ने इस मौके पर कहा कि मैंने तय किया था कि जब तक किसी दूसरे शख्स से ज्यादा उपयोगी बना रहूंगा, तब तक इस पद पर बना रहूंगा। उन्होंने कहा कि इस बात से हैरानी होती है कि यह सफर इतना लंबा चला।
यह भी पढ़ें : आह माल्टा…वाह माल्टा
निवेश है पहली पसंद
बफे के लिए निवेश करना या कंपनी चलाना कोई काम नहीं है। उनके लिए यह वो चीज है जो उन्हें काफी ज्यादा पसंद है। उन्हें निवेश करना, पढ़ना और कारोबार के बारे में विचार करते रहना काफी ज्यादा भाता है। बफे कहते हैं कि उनके लिए रिटायरमेंट एक अंत नहीं है। यह वह काम करते रहने का एक विकल्प है जो उन्हें ऊर्जावान और उत्साहित रखता है। उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि वह अपने दिन का लगभग 80% हिस्सा पढ़ने और सोचने में बिताते हैं। यह उनके दिमाग को तेज और नजरिए को ताजा रखता है। सीखने और उत्सुक रहने की इसी भूख ने दशकों से उनकी सफलता को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के बाद वह वही काम करेंगे जो उन्हें अच्छा लगेगा। वॉरेन बफे 95 साल के हो गए हैं। इस पड़ाव पर उम्र के कुछ लक्षण तो नजर आ जाते हैं जैसे कि कभी-कभार याददाश्त का कमजोर हो जाना। या फिर संतुलन में कमी लेकिन उसके बावजूद उनकी निवेश की समझ कम नहीं हुई है। वह कहते हैं कि उनकी निवेश की समझ इस उम्र में भी पहले की तरह ही तेज है। बफे कहते हैं कि वह किसी चीज को अगर संभालना जानते हैं तो वह बाजार में मची अफरा-तफरी है। उन्होंने कहा कि अगर बाजार में डर का माहौल रहेगा तो मैं उपयोगी रहूंगा। उन्होंने आगे कहा कि जब चीजों की कीमत गिरती है या बाकी सब डर जाते हैं तो मैं नहीं डरता।

बफे के उत्तराधिकारी
वॉरेन बफे ने मई, 2021 में ग्रेग एबेल को अपना उत्तराधिकारी बनाया था। एबेल बर्कशायर हैथवे में वाइस-चेयरमैन हैं। 62 वर्षीय ग्रेग एबेल अब बर्कशायर हैथवे जैसी दिग्गज कंपनी की कमान संभालेंगे। पिछले करीब 25 वर्षों से वह बर्कशायर समूह का हिस्सा रहे हैं। कनाडा के एडमंटन में जन्मे ग्रेग एबेल का सफर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ। पढ़ाई के दौरान उन्होंने बोतलें धोने, फायर एक्सटिंगुइशर की सर्विसिंग जैसे छोटे काम करके अपने खर्च पूरे किए। 1984 में यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा से ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने प्राइजवाटर हाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) और कालएनर्जी जैसी कंपनियों में अनुभव हासिल किया। 1992 में वह मिड अमेरिकन एनर्जी से जुड़े। इस कंपनी को 1999 में बर्कशायर हैथवे ने अधिग्रहित कर लिया। यहीं से उनके करियर को नई दिशा मिली। 2008 में वह मिड अमेरिकन के सीईओ बने और धीरे-धीरे बर्कशायर की नॉन-इंश्योरेंस इकाइयों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। इसमें बीएनएसएफ रेलवे, बर्कशायर हैथवे एनर्जी और कई रिटेल व इंडस्ट्रियल बिजनेस शामिल हैं।
बफे के भरोसेमंद
वॉरेन बफे लंबे समय से ग्रेग एबेल पर भरोसा जताते आए हैं। उन्होंने 2021 में ही कह दिया था कि अगर वह सीईओ पद छोड़ेंगे तो उनके उत्तराधिकारी ग्रेग एबेल ही होंगे। अब तक ग्रेग इंश्योरेंस कारोबार और बड़े निवेश निर्णयों से सीधे तौर पर नहीं जुड़े थे लेकिन आगे यह जिम्मेदारी भी उन्हें निभानी होगी।इसमें वाइस चेयरमैन अजीत जैन उनका साथ देंगे। बर्कशायर में एबेल की असली चुनौती अब शुरू हो रही है। बफे जैसे लीजेंड और जिन्होंने बेहद व्यक्तिगत अंदाज में फैसले लिए, उनकी जगह लेना आसान नहीं होगा। एबेल के पास वैसी हिस्सेदारी नहीं है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अलग हो सकती है। फिर भी बफे ने साफ कहा है कि उन्हें ग्रेग पर पूरा भरोसा है और वह कंपनी में अपना वित्तीय निवेश बनाए रखेंगे। अब हर निवेशक के मन में यही सवाल है कि क्या ग्रेग एबेल नेक्स्ट वॉरेन बफे बन पाएंगे? अब ये तो वक्त ही बताएगा कि ग्रेग बफे की विरासत को कितनी सफलता से आगे बढ़ा पाते हैं।
11 साल में खरीदे शेयर, 13 में पहली बार भरा इनकम टैक्स
वॉरेन बफे का जन्म 30 अगस्त 1930 को अमेरिका के नेब्रास्का राज्य में हुआ था। बहुत कम उम्र में ही उन्हें निवेश की समझ हो गई थी। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला शेयर खरीदा। 13 साल के होते-होते पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न भी दाखिल कर दिया। आज वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों में गिने जाते हैं। टॉप के अमीरों में शामिल होने के बावजूद वॉरेन बफे की जीवनशैली काफी साधारण है। वह आज भी बेहद ही सादा जीवन जीते हैं। बफे पिछले करीब 67 सालों से ओमाहा के उसी पुराने घर में रहते हैं, जिसे उन्होंने 50 के दशक में 31,500 डॉलर में खरीदा था। वह इसे अपने सबसे समझदारी भरे निवेशों में से एक मानते हैं। समय के साथ उस घर की कीमत लगभग 44 गुना बढ़कर 14.39 लाख डॉलर (करीब 11.9 करोड़ रुपये) तक पहुंच चुकी है। बफे का कहना है कि यह घर उन्हें सुकून और खुशी देता है। 2009 में बीबीसी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह इससे बेहतर घर की कल्पना नहीं कर सकते। दिलचस्प बात यह है कि उनके निवेश पोर्टफोलियो में यही एकमात्र रियल एस्टेट है।

हार्वर्ड से इनकार ने बदली किस्मत
पढ़ाई के मोर्चे पर भी उनका सफर आसान नहीं रहा। या यूं कहें कि किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही सोचा था। यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का से ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में दाखिले के लिए आवेदन किया। इंटरव्यू शिकागो के पास हुआ और मुश्किल से दस मिनट चला। इंटरव्यू लेने वालों ने पहले ही संकेत दे दिया था कि हार्वर्ड उनके लिए नहीं है। यह सुनकर वह निराश हो गए और सोचने लगे कि अपने पिता को क्या बताएंगे। लेकिन यही नाकामी उनकी किस्मत का टर्निंग पॉइंट बन गई। हार्वर्ड से इंकार के बाद उन्होंने दूसरे विकल्प तलाशे और कोलंबिया बिजनेस स्कूल का कैटलॉग देखते समय उनकी नजर दो नामों पर गई। बेंजामिन ग्राहम और डेविड डोड। वह पहले ही इन दोनों की लिखी किताब सिक्योरिटी एनालिसिस पढ़ चुके थे। इसी दौरान बफे ने प्रोफेसर डोड को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने ईमानदारी और उत्सुकता के साथ कोलंबिया में पढ़ने की इच्छा जताई। इस पत्र का असर हुआ और उन्हें कोलंबिया बुला लिया गया। आगे चलकर बेंजामिन ग्राहम ने उन्हें निवेश के वह मूल नियम सिखाए, जिनका पालन बफे आज तक करते हैं और जिनकी बदौलत वह दुनिया के सबसे महान निवेशकों में शामिल हुए। इस तरह बफे ने नेब्रास्का-लिंकन विश्वविद्यालय और कोलंबिया बिजनेस स्कूल में पढ़ाई पूरी की।
कोका-कोला, चिप्स के शौकीन
आज जब हर तरफ हेल्दी डाइट और स्वस्थ रहने के लिए कई तरह की गतिविधियां करने पर जोर दिया जा रहा है, तब वॉरेन बफे इस ध्रुव के दक्षिणी छोर पर नजर आते हैं। 94 साल की उम्र में वॉरेन बफे की जो फूड हैबिट्स हैं, वह हेल्दी डाइट और स्वस्थ रहने की इन सभी गतिविधियों को धत्ता बताती हैं। 94 वर्ष की उम्र में भी वॉरेन बफे की जीवनशैली हैरान करने वाली है। वह न तो नियमित कसरत करते हैं और न ही किसी सख्त डाइट को फॉलो करते हैं। इसके बावजूद वह बिना किसी परेशानी के हर दिन पूरे जोश के साथ सक्रिय रहते हैं। उनकी दिनचर्या को देखें तो इसमें रोज़ाना करीब पांच कैन कोका-कोला शामिल हैं। नाश्ता वह अक्सर मैकडॉनल्ड्स से करते हैं। बफे नाश्ता क्या करेंगे, इसको लेकर भी वह बड़ा रुचिकर तरीका अपनाते हैं। वह अक्सर बाजार की चाल को देखकर अपना नाश्ता तय करते हैं। वह हफ्ते में कम से कम तीन बार मैकडॉनल्ड्स के चिकन मैकनगेट्स खाते हैं। स्नैक्स में आलू के चिप्स पसंद करते हैं और मिठाई के तौर पर आइसक्रीम उनकी कमजोरी है।दिलचस्प बात यह है कि 1990 के दशक से उनकी खान-पान की आदतों में लगभग कोई बदलाव नहीं आया है। हॉट डॉग, फ्रेंच फ्राइज, पॉपकॉर्न, कुकीज और तरह-तरह की कैंडी, उनकी पसंद में शामिल है। और आज भी वह इनका सेवन करते हैं। बफे इस विषय को लेकर खुद भी काफी हल्के-फुल्के अंदाज में बात करते हैं। एक बार उन्होंने मजाक में कहा था कि उन्होंने एक्चूरियल टेबल्स देखीं और पाया कि सबसे कम मृत्यु दर छह साल के बच्चों में होती है। इसलिए उन्होंने भी छह साल के बच्चे की तरह खाने का फैसला किया। उनका मानना है कि जिंदगी सिर्फ लंबी हो, यह जरूरी नहीं। जिंदगी खुशहाल हो, यह ज्यादा मायने रखता है। वह कहते हैं कि अगर कोई उनसे यह कहे कि पूरी उम्र सिर्फ ब्रोकली और कुछ गिनी-चुनी चीजें खाने से वह एक साल ज्यादा जी सकते हैं, तो वह खुशी-खुशी वह एक साल छोड़ देंगे और वही खाना चुनेंगे जो उन्हें पसंद है। बफे के लिए भोजन सिर्फ सेहत का सवाल नहीं, बल्कि आनंद और संतुष्टि का हिस्सा है। और शायद यही सोच उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती है।
बफे के निवेश के दो नियम
वॉरेन बफे निवेश को लेकर बेहद सरल लेकिन कठोर सिद्धांतों में भरोसा रखते हैं। उनके अनुसार निवेश के केवल दो बुनियादी नियम हैं। पहला, बाजार में अपना पैसा मत गंवाइए। दूसरा, पहले नियम को कभी मत भूलिए। बफे का मानना है कि किसी साधारण कंपनी को बेहद सस्ती कीमत पर खरीदने से कहीं बेहतर है कि एक बेहतरीन कंपनी को वाजिब कीमत पर खरीदा जाए। उनके लिए गुणवत्ता हमेशा कीमत से ऊपर रही है। बफे इस सोच पर अडिग हैं कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव किसी कंपनी के असली कारोबार की तस्वीर नहीं दिखाते। शेयरधारकों को लिखे अपने एक पत्र में उन्होंने समझाया कि कई शेयर बहुत तेजी से ऊपर जाते हैं और उतनी ही तेजी से गिर भी जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि उस कंपनी की बुनियादी ताकत बदल गई है। ऐसे उतार-चढ़ाव अक्सर बाजार की भावनाओं को दर्शाते हैं, न कि बिजनेस की वास्तविक कीमत को। उन्होंने अपने गुरु और प्रसिद्ध अमेरिकी निवेशक बेन्जामिन ग्राहम का हवाला देते हुए कहा कि छोटी अवधि में शेयर बाजार एक वोटिंग मशीन की तरह काम करता है, जहां भावनाएं हावी रहती हैं। जबकि लंबी अवधि में वही बाजार वजन तौलने वाली मशीन बन जाता है, जहां कंपनी की असली वैल्यू सामने आती है। बफे का विश्वास है कि समय के साथ शेयर की कीमतें आखिर में बिजनेस की वास्तविक क्षमता की ओर लौटती हैं। उनका कहना है कि बड़ी से बड़ी कंपनियां भी चूक करती हैं, लेकिन असली परीक्षा यह होती है कि आप उन गलतियों से कैसे उबरते हैं। दुनिया में मूर्खतापूर्ण फैसलों की कोई कमी नहीं है, अहम यह है कि हम उनसे क्या सीखते हैं। उन्हें दोहराना या उनसे दूरी बनाना। बफे के अनुसार, सफल निवेश की नींव बचत है। बिना बचत के निवेश सिर्फ एक भ्रम बनकर रह जाता है।
50 की उम्र के बाद बनाया खूब पैसा
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक वॉरेन बफे की कुल संपत्ति करीब 160 अरब डॉलर है। इतनी विशाल दौलत के बावजूद बफे का निजी जीवन बेहद सादगी और दिलचस्प शौकों से भरी हुई है। उन्हें ब्रिज कार्ड गेम खेलने का खास शौक है। “वॉशिंगटन पोस्ट’ के मुताबिक वह कई बार हफ्ते में आठ घंटे से भी ज्यादा समय इसी खेल में बिता देते हैं। इसके अलावा वह गोल्फ खेलना पसंद करते हैं। खूब पढ़ते हैं और संगीत से भी गहरा लगाव रखते हैं। खास तौर पर यूकुलेले। बफे ने 2020 में बताया था कि उनके पास 22 यूकुलेले का कलेक्शन है। बफे ने सामाजिक कामों में भी अपने शौक को शामिल किया है। एक बार उन्होंने 17 हिलो यूकुलेले खरीदे और नॉर्थ ओमाहा स्थित गैर-लाभकारी संस्था गर्ल्स इंक को दान कर दिए। सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने खुद जाकर बच्चों को सामूहिक रूप से बजाना भी सिखाया। बफे की संपत्ति का बड़ा हिस्सा उनकी सार्वजनिक कंपनी बर्कशायर हैथवे से जुड़ा है। बफे बर्कशायर के लगभग 15% शेयरों के मालिक हैं, जिनकी कीमत करीब 150 अरब डॉलर आंकी जाती है। जबकि कंपनी की कुल संपत्तियां एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि बफे की अधिकांश कमाई 50 वर्ष की उम्र के बाद हुई। बर्कशायर में उनका वेतन पिछले 40 वर्षों से महज 1 लाख डॉलर सालाना है, और उन्होंने निजी फोन कॉल व डाक खर्च के लिए कंपनी को 50,000 डॉलर तक वापस भी किए। वहीं 2023 में कंपनी ने उनकी व्यक्तिगत और घरेलू सुरक्षा पर 3.13 लाख डॉलर से अधिक खर्च किए जो उनके वार्षिक वेतन से भी तीन गुना था।








