दिग्गज निशानेबाज और कोच Jaspal Rana के निधन से पूरे उत्तराखंड में शोक है। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए देहरादून स्थित आवास पर रखा गया जहां परिवार, मित्रों, खेल जगत से जुड़े लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। उनका अंतिम संस्कार वाराणसी में होगा।
शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी जसपाल राणा को श्रद्धांजलि दी, शोक संतप्त परिवार को दुख की इस घड़ी में ढांढस बंधाया और हर संभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने जसपाल राणा को श्रद्धांजलि देते हुए सीएम धामी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, उनका निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय प्रतिभा, अनुशासन, समर्पण और असाधारण उपलब्धियों के माध्यम से न केवल देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि खेलों के प्रति समर्पित नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक अमिट स्रोत भी बने। उनके योगदान को सदैव श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किया जाएगा।



जसपाल राणा की शिष्य और ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर भी अपने गुरु के अंतिम दर्शन करने देहरादून पहुंची। मनु अपने कोच राणा के परिजनों से मिलते वक्त भी फूट-फूट कर रोईं। मनु जितनी देर वहां रहीं, उनके आंख से आंसू गिरते रहे।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और हरीश रावत ने राणा के आवास पहुंचकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।



जसपाल राणा के निधन की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव टटोर, नैनबाग चिलामू समेत आसपास के क्षेत्रों में शोक छा गया। गांव के बड़ी संख्या में लोग अपने प्रिय खिलाड़ी को श्रद्धांजलि देने के लिए देहरादून पहुंचे। राणा के करीबी मित्र प्रदीप कवि, मोहन सिंह रावत और डॉ. विरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जसपाल राणा बेहद सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। कुछ माह पूर्व वह अपने गांव आए थे और स्थानीय लोगों से आत्मीयता के साथ मिले थे। उन्होंने बताया कि जसपाल राणा का जन्म उत्तरकाशी जिले में हुआ था। उस समय उनके पिता नारायण सिंह राणा आईटीबीपी में तैनात थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मसूरी और दिल्ली में हुई, जहां उन्होंने निशानेबाजी का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। उनके निधन पर धनोल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय रावत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुरारी लाल खंडवाल, ब्लॉक प्रमुख सीता पंवार सहित विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त किया। इसके बाद परिजन उनकी पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए वाराणसी ले गए।
VIDEO | Dehradun: Jaspal Rana’s mortal remains are being taken to Varanasi for last rites.
Jaspal Rana, one of India’s finest pistol shooters who made a hugely successful transition to coaching and guided Manu Bhaker to epoch-making twin bronze medals at the Paris Olympics,… pic.twitter.com/bEyaNLLx1c
— Press Trust of India (@PTI_News) June 13, 2026
गरीब बच्चों को निशुल्क देते थे प्रशिक्षण
खेलों के प्रति समर्पित जसपाल राणा वर्ष 2012 से युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे थे। देहरादून स्थित अपनी शूटिंग रेंज में वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निशुल्क निशानेबाजी का प्रशिक्षण देते थे। उनके इस प्रयास से कई युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे।
खेल परिवार की मजबूत विरासत
पूर्व खेल राज्य मंत्री नारायण सिंह राणा के तीन बच्चों में जसपाल सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई सुभाष राणा अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और कोच हैं, जबकि बहन सुषमा राणा भी निशानेबाजी से जुड़ी रही हैं। सुषमा राणा केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के परिवार की बहू हैं।
जसपाल राणा की बेटी देवांशी राणा ने भी शूटिंग में विश्व स्तर पर पदक जीतकर परिवार और देश का नाम रोशन किया है। वहीं पुत्र युवराज राणा भी निशानेबाजी में अपना करियर बना रहे हैं।
कोच के निधन से टूटीं मनु भाकर, श्रद्धांजलि देते समय छलके आंसू

जसपाल राणा भारतीय पिस्टल निशानेबाजी टीम के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे। हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से लौटने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उपचार के दौरान हृदय संबंधी समस्या के कारण उनका निधन हो गया। मनु भाकर की अंतरराष्ट्रीय सफलता में जसपाल राणा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु के ऐतिहासिक पदक जीतने के पीछे राणा का मार्गदर्शन और वर्षों की मेहनत शामिल रही। ओलंपिक में जब मनु ने पदक जीता था, तब स्टैंड में बैठे जसपाल राणा की खुशी देखने लायक थी। वह अपनी शिष्या की सफलता पर गर्व से तालियां बजा रहे थे।
कोच के निधन के बाद मनु भाकर ने सोशल मीडिया पर जसपाल राणा के साथ कई तस्वीरें साझा कीं। इनमें पेरिस ओलंपिक की यादगार तस्वीरें भी शामिल हैं। पोस्ट के साथ उन्होंने केवल दो शब्द लिखे-अपूरणीय क्षति। साथ ही टूटे दिल का इमोजी साझा कर अपने गुरु के प्रति श्रद्धांजलि और गहरा दुख व्यक्त किया। भारतीय निशानेबाजी जगत मानता है कि जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं बल्कि ऐसे गुरु थे जिन्होंने देश को कई प्रतिभाशाली निशानेबाज दिए। मनु भाकर की सफलता उनकी कोचिंग विरासत का सबसे चमकदार अध्याय बनकर हमेशा याद की जाएगी।











