प्री-डायबिटीज को अक्सर केवल मधुमेह की शुरुआती अवस्था माना जाता है लेकिन अब एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने संकेत दिया है कि यह स्थिति स्वयं भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी हो सकती है। शोध में पाया गया है कि यदि प्री-डायबिटीज से ग्रस्त व्यक्ति अपने ब्लड शुगर स्तर को दोबारा सामान्य सीमा में ले आते हैं तो उनमें गंभीर हृदय रोगों का खतरा 58 प्रतिशत तक कम हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव न केवल डायबिटीज की आशंका घटाता है बल्कि लंबे समय तक हृदय को भी सुरक्षित रखने में मददगार साबित हो सकता है। किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन के अनुसार, ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर लाने वाले लोगों में हृदय रोग से मौत या हार्ट फेलियर के कारण अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम आधे से अधिक घट गया।
क्या है प्री-डायबिटीज?
प्री-डायबिटीज ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति का रक्त शर्करा स्तर सामान्य से अधिक होता है लेकिन इतना नहीं कि उसे टाइप-2 डायबिटीज की श्रेणी में रखा जाए। विशेषज्ञ इसे भविष्य में मधुमेह विकसित होने की चेतावनी मानते हैं। हालांकि हालिया शोध बताते हैं कि यह स्थिति अपने आप में भी हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है।
दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही समस्या
प्री-डायबिटीज वैश्विक स्तर पर तेजी से फैल रही स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। अनुमान है कि दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। ब्रिटेन में लगभग हर पांचवां वयस्क व्यक्ति डायबिटीज या प्री-डायबिटीज से जूझ रहा है। वहीं अमेरिका में हर तीन में से एक व्यक्ति और चीन में करीब 40 प्रतिशत वयस्क इस स्थिति की चपेट में हैं। विशेषज्ञ इसके लिए बदलती जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खानपान को प्रमुख कारण मानते हैं।
दशकों तक चले अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने अमेरिका के डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम आउटकम्स स्टडी और चीन के डाकिंग डायबिटीज प्रिवेंशन आउटकम्स स्टडी के आंकड़ों का दोबारा विश्लेषण किया। इन अध्ययनों में हजारों प्री-डायबिटीज मरीजों को शामिल किया गया था और कई वर्षों तक उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी गई। प्रतिभागियों को संतुलित आहार अपनाने, नियमित व्यायाम करने और वजन नियंत्रित रखने जैसी जीवनशैली संबंधी सलाह दी गई थी। अध्ययन के दौरान यह देखा गया कि जिन लोगों का ब्लड शुगर स्तर सामान्य सीमा में लौट आया, उनमें हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम उल्लेखनीय रूप से कम था।

हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी घटा
अध्ययन में यह भी सामने आया कि प्री-डायबिटीज से बाहर निकलने वाले लोगों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य प्रमुख हृदय संबंधी घटनाओं का खतरा 42 प्रतिशत तक कम पाया गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस लाभ का असर केवल कुछ वर्षों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई दशकों बाद भी इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दिए। अमेरिका और चीन के प्रतिभागियों में लगभग समान नतीजे मिलने से अध्ययन की विश्वसनीयता और मजबूत हुई है।
केवल जीवनशैली में बदलाव नहीं, परिणाम भी जरूरी
शोध का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि केवल स्वस्थ जीवनशैली अपनाना पर्याप्त नहीं हो सकता। पहले के अध्ययनों में व्यायाम, बेहतर खानपान और वजन घटाने से हृदय रोगों का जोखिम कम होने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले थे। हालांकि ये उपाय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, लेकिन नए अध्ययन के अनुसार सबसे बड़ा फायदा तब मिलता है जब इन प्रयासों के परिणामस्वरूप ब्लड शुगर वास्तव में सामान्य स्तर पर पहुंच जाए। वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल डायबिटीज को टालना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि प्री-डायबिटीज की स्थिति से पूरी तरह बाहर निकलना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
हृदय रोगों की रोकथाम में नई दिशा

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में हृदय रोगों की रोकथाम के लिए प्री-डायबिटीज को सामान्य स्तर पर लाना एक अहम रणनीति बन सकता है। अभी तक रक्तचाप नियंत्रित रखना, कोलेस्ट्रॉल कम करना और धूम्रपान छोड़ना हृदय सुरक्षा के प्रमुख उपाय माने जाते रहे हैं। अब प्री-डायबिटीज से छुटकारा पाने को भी इस सूची में महत्वपूर्ण स्थान मिल सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस विषय पर आगे और अध्ययन की जरूरत है लेकिन मौजूदा निष्कर्ष संकेत देते हैं कि समय रहते ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर लाना न केवल मधुमेह से बचाव कर सकता है बल्कि लंबे समय तक बेहतर हृदय स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करने में भी मददगार हो सकता है।










