उत्तराखंड जल संस्थान के राजकीयकरण की मांग को लेकर Uttarakhand Jal Sansthan अधिकारी/कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर मुख्यालय में पिछले 16 दिनों से चल रहा धरना मंगलवार को सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया गया। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि सरकार के निर्णय की प्रतीक्षा में फिलहाल स्थगित किया गया है। यदि मांग के अनुरूप फैसला नहीं हुआ तो पहले से अधिक व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
धरने के 16वें दिन जनपद टिहरी के कर्मचारियों ने धरना स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान टीकाराम रतूड़ी, संजय नेगी, लक्ष्मण सिंह पंवार, जयपाल सिंह रावत, अनिल भट्ट, जितेन्द्र सकलानी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी धरने पर बैठे। कर्मचारियों ने सरकार से Uttarakhand Jal Sansthan एवं पेयजल निगम के शीघ्र राजकीयकरण की मांग दोहराते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित इस मांग का अब स्थायी समाधान होना चाहिए।

आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि एवं उत्तराखंड पिछड़ा राज्य कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री स्तर) अशोक वर्मा तथा शासन की ओर से पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की अपर सचिव श्रीमती झरना कमठान धरना स्थल पर पहुंचीं। इस दौरान संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत वार्ता हुई। कर्मचारियों की ओर से राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रकाश रणाकोटी, मुख्य संयोजक नंदलाल जोशी, मोर्चा के सलाहकार गजेंद्र कुमार कपिल, जयपाल सिंह चौहान तथा उत्तराखंड जल संस्थान डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के प्रदेश महासचिव यशवंत सिंह रावत सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
वार्ता के दौरान अपर सचिव श्रीमती झरना कमठान ने कर्मचारियों को बताया कि उत्तराखंड जल संस्थान एवं पेयजल निगम के राजकीयकरण के संबंध में 22 जुलाई 2026 को सचिव, पेयजल की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की भावनाओं के अनुरूप उनके मांगपत्र पर सकारात्मक कार्रवाई के लिए शासन स्तर पर पूरा पक्ष रखा जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि मांग के संबंध में त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसी कारण कर्मचारियों से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया गया।
मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि अशोक वर्मा ने भी कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार उनकी मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी परिस्थिति में उनका अहित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कर्मचारियों से सरकार पर विश्वास बनाए रखने की अपील की।
इसके बाद संयुक्त मोर्चा के मुख्य संयोजक नंदलाल जोशी ने कर्मचारियों के बीच सरकार और शासन के प्रतिनिधियों से हुई वार्ता का पूरा विवरण रखा। कर्मचारियों के बीच लंबी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से आंदोलन को आगामी आदेश तक स्थगित करने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर मोर्चा की ओर से आंदोलन के सफल संचालन तथा सरकार और शासन से सकारात्मक वार्ता कराने में सहयोग देने वाले सभी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार भी व्यक्त किया गया।
मोर्चा के सलाहकार गजेंद्र कुमार कपिल ने कहा कि कर्मचारियों को सरकार और शासन द्वारा दिए गए आश्वासन पर विश्वास रखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धरना समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि केवल स्थगित किया गया है। यदि सरकार कर्मचारियों की मांगों के अनुरूप निर्णय लेने में विफल रहती है तो संयुक्त मोर्चा पहले से अधिक मजबूती, एकजुटता और व्यापक समर्थन के साथ फिर से आंदोलन शुरू करेगा।











