केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए उत्तराखंड, कर्नाटक और त्रिपुरा के साथ सुधार संबंधी समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और राज्य मंत्री वी सोमन्ना की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। यह पहल सहकारी संघवाद को मजबूती देने के साथ-साथ ग्राम पंचायत-आधारित जल प्रबंधन प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जेजेएम 2.0 के तहत 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को नल के जरिए सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को मंजूरी दी थी।
MoU के तहत ग्राम पंचायत-नेतृत्व वाले, सेवा-आधारित और समुदाय-केंद्रित जल प्रशासन मॉडल को अनिवार्य बनाया गया है। इसका उद्देश्य केवल जलापूर्ति सुनिश्चित करना ही नहीं बल्कि दीर्घकालिक रखरखाव, पारदर्शिता और जनभागीदारी को भी बढ़ावा देना है। केंद्र ने राज्यों से ग्राम स्तर पर संचालन एवं रखरखाव नीति लागू करने, जेजेएम डैशबोर्ड पर नियमित डेटा अपलोड करने और सुजल गांव आईडी विकसित करने का आग्रह किया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पाटिल ने कहा कि जल जीवन मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि ग्रामीण भारत में जीवन स्तर बदलने वाला जनआंदोलन है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के जीवन में इसके सकारात्मक प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षित जल उपलब्धता से स्वास्थ्य, गरिमा और समय की बचत सुनिश्चित होती है। उन्होंने मिशन की समयसीमा दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की जानकारी भी दी।
उत्तराखंड: 98% कवरेज के करीब
उत्तराखंड ने जेजेएम के तहत उल्लेखनीय प्रगति करते हुए 98 प्रतिशत कवरेज हासिल कर लिया है। राज्य में कुल 14.48 लाख ग्रामीण परिवारों में से 14.20 लाख को नल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि का श्रेय केंद्र सरकार के सहयोग और राज्य के प्रयासों को दिया। उन्होंने बताया कि भूस्खलन जैसी भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद राज्य ने एसएआरएआरए पहल के तहत 6500 जल स्रोतों का पुनरुद्धार किया और 3.5 मिलियन क्यूबिक मीटर वर्षा जल संचयन सुनिश्चित किया। धामी ने एमओयू के सभी प्रावधानों का पालन करने की प्रतिबद्धता भी जताई।

कर्नाटक: शुष्क परिस्थितियों के बीच 87% प्रगति
कर्नाटक ने भी 87 प्रतिशत कवरेज हासिल किया है हालांकि राज्य को भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और ग्रामीण विकास मंत्री प्रियांक खर्गे ने कार्यक्रम में वर्चुअल भागीदारी की।
त्रिपुरा: 3% से 86% तक का सफर
पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा ने जल जीवन मिशन के तहत उल्लेखनीय प्रगति करते हुए 2019 के 3 प्रतिशत कवरेज से बढ़कर 86 प्रतिशत तक पहुंच बना ली है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इसे राज्य की बड़ी उपलब्धि बताया। राज्य में 151 ग्राम पंचायतों में जल सेवा आकलन पूरा किया जा चुका है और सभी आठ जिलों में जिला तकनीकी इकाइयों का गठन किया गया है।
ग्राम पंचायतों की भूमिका अहम
जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक केके मीणा ने कहा कि यह एमओयू केंद्र और राज्यों के बीच साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायतें जल कर संग्रह और स्थानीय स्तर पर जल प्रणालियों के रखरखाव में अहम भूमिका निभाएंगी। इससे योजनाओं की स्थिरता और जवाबदेही बढ़ेगी। कार्यक्रम में राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव कमल किशोर सोन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मंत्री पाटिल ने अंत में कहा कि जन शिकायतों के त्वरित समाधान और पारदर्शी व्यवस्था से ही मिशन की सफलता सुनिश्चित होगी।










