कभी सीमित संख्या में पर्यटकों की दस्तक सुनने वाला सीमांत जिला पिथौरागढ़ अब उत्तराखंड के उभरते पर्यटन केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर घाटियां अब देश-दुनिया के यात्रियों को आकर्षित कर रही हैं। खास बात यह है कि पिछले तीन वर्षों में जिले में आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगभग दस गुना वृद्धि दर्ज की गई है जिसने स्थानीय पर्यटन कारोबार को नई ऊर्जा प्रदान की है।
पर्यटन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2023 में जिले में 1.36 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे थे। इसके बाद पर्यटकों की संख्या में लगातार तेजी आई। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 2.09 लाख के पार पहुंच गया। जबकि, वर्ष 2025 में अब तक 3.87 लाख से अधिक पर्यटक जिले का रुख कर चुके हैं। यह बढ़ोतरी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर स्थानीय होटल व्यवसाय, परिवहन, होमस्टे और छोटे कारोबारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
आदि कैलाश यात्रा बनी बदलाव की बड़ी वजह
जानकारों का मानना है कि अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दर्शन के बाद पिथौरागढ़ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। इसके बाद सीमांत क्षेत्र के धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी जिले के खूबसूरत स्थलों की तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा होने लगे, जिससे पर्यटकों का आकर्षण और बढ़ा। आदि कैलाश, ओम पर्वत, व्यास घाटी, मुनस्यारी और पाताल भुवनेश्वर जैसे स्थलों ने यात्रियों को नए अनुभव प्रदान किए हैं। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर और प्रकृति प्रेमियों की संख्या में भी उल्लेखनीय इजाफा देखा गया है।
मार्च में इन स्थलों पर रही सबसे ज्यादा रौनक
मार्च माह के दौरान जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की अच्छी खासी आवाजाही दर्ज की गई। धारचूला क्षेत्र सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहा, जहां 38,728 पर्यटक पहुंचे। इसके बाद मुनस्यारी में 24,526 और पाताल भुवनेश्वर में 16,120 पर्यटकों ने भ्रमण किया। जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ में 12,597, चौकोड़ी में 9,800 और गंगोलीहाट में 8,400 पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के विभिन्न हिस्सों में पर्यटन गतिविधियां लगातार विस्तार पा रही हैं।

होटल और होमस्टे कारोबार को मिला लाभ
पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सीधा लाभ स्थानीय कारोबारियों को मिल रहा है। जिले में होटल, होमस्टे, टैक्सी संचालन, स्थानीय हस्तशिल्प और खानपान से जुड़े व्यवसायों में नई रौनक देखने को मिल रही है। पर्यटन सीजन के दौरान कई क्षेत्रों में ठहरने की व्यवस्थाएं पहले से बेहतर हुई हैं और नए निवेश की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। युवाओं का रुझान भी अब पर्यटन आधारित स्वरोजगार की ओर बढ़ रहा है।
सुविधाओं के विस्तार की जरूरत
हालांकि पर्यटन के बढ़ते कदमों के साथ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। जिले के कई रमणीय स्थलों तक पहुंचने के लिए अभी पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। व्यू प्वाइंट, पार्किंग, शौचालय और पर्यटक सुविधा केंद्रों के विकास की आवश्यकता महसूस की जा रही है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान सड़क संपर्क सुचारु बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि वर्षभर सुरक्षित और सहज आवागमन सुनिश्चित किया जाए तो जिले में पर्यटन की संभावनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं।
सीमांत जिले के लिए नया अवसर
हिमालय की गोद में बसे पिथौरागढ़ के लिए पर्यटन केवल एक उद्योग नहीं बल्कि विकास का नया माध्यम बनता दिखाई दे रहा है। प्राकृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों से समृद्ध यह जिला अब देश के प्रमुख पर्यटन नक्शे पर तेजी से उभर रहा है। यदि बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास की रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में पिथौरागढ़ उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।










