मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल बैठक के बाद राज्य सरकार ने Uttarakhand में ऊर्जा संरक्षण, ईंधन बचत और सतत विकास को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने सभी विभागों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोविड महामारी के बाद की आर्थिक चुनौतियां, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते ऊर्जा दक्षता और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य ऊर्जा खपत कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को जनआंदोलन का रूप देना है।
सरकारी दफ्तरों में ऊर्जा बचत पर सख्ती
नई व्यवस्था के तहत सभी सरकारी कार्यालयों में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाएगा। अनावश्यक बिजली, रोशनी और ऊर्जा उपकरणों के उपयोग पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा। विभागों को नियमित निगरानी के साथ ऊर्जा बचत के प्रति संवेदनशील बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
कार पूलिंग, नो व्हीकल डे और वर्चुअल बैठकों को बढ़ावा
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग और साझा वाहन व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। ईंधन बचत के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकों को प्राथमिकता दी जाएगी और अनावश्यक भौतिक बैठकों को सीमित किया जाएगा। इसके साथ ही वर्क फ्रॉम होम, नो व्हीकल डे, कर्मचारी बस सेवाएं और साइकिल शेयरिंग जैसी व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। निजी संस्थानों से भी ऊर्जा संरक्षण अभियान में भागीदारी की अपील की गई है। राज्य सरकार ने ईवी के उपयोग और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार पर विशेष बल दिया है। साथ ही पीएनजी, एलपीजी और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। वहीं, संपीड़ित बायो गैस परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने और नगर निकायों को ठोस अपशिष्ट से बायो गैस उत्पादन की संभावनाओं पर काम करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार विजिट माय स्टेट / हॉलिडे इन इंडिया अभियान के जरिए स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देगी। धार्मिक, सांस्कृतिक, ग्रामीण और ईको पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अलावा डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि स्थानीय पर्यटन बढ़ने से लंबी दूरी की अनावश्यक यात्राओं में कमी आएगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
“जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की फ्लीट में 50% कटौती और एक अधिकारी-एक वाहन की व्यवस्था लागू की गई है।”: श्री आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव pic.twitter.com/N2LTDeKmB3
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) May 14, 2026
स्थानीय उद्योगों और उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए “मेड इन उत्तराखंड” अभियान चलाया जाएगा। ओडीओपी, अमेजन कारीगर और फ्लिपकार्ट समर्थ जैसे मंचों के माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों और स्वयं सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और जीआई टैग उत्पादों के प्रचार-प्रसार को भी प्राथमिकता दे रही है, जिससे रोजगार और स्वरोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
खेती में जैविक मॉडल पर फोकस
कृषि क्षेत्र में जैविक खेती और बायो-इनपुट आधारित कृषि को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है। किसानों को प्राकृतिक खेती और जीरो बजट खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एफपीओ और सहकारी समितियों के माध्यम से बायो-इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिले। खनन, सौर ऊर्जा और अन्य बड़ी निवेश परियोजनाओं के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा। राज्य स्तरीय सशक्त समितियों के माध्यम से परियोजनाओं पर त्वरित निर्णय सुनिश्चित किए जाएंगे।
धामी सरकार के प्रमुख फैसले
- सरकारी दफ्तरों में एसी 24-26 डिग्री पर रहेगा
- कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकों को प्राथमिकता
- नो व्हीकल डे और वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहन
- ईवी चार्जिंग नेटवर्क विस्तार पर जोर
- रूफटॉप सोलर और बायो गैस परियोजनाओं को बढ़ावा
- स्थानीय पर्यटन को प्रोत्साहन
- मेड इन उत्तराखंड अभियान शुरू होगा
- जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
- बड़ी परियोजनाओं के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था मजबूत होगी










