कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा बृहस्पतिवार को खराब मौसम की भेंट चढ़ गया। अल्मोड़ा और गढ़वाल में प्रस्तावित उनके सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए जिसके बाद वह पंतनगर से वापस दिल्ली लौट गए। हालांकि, राहुल गांधी ने अल्मोड़ा के सिमकनी में आयोजित जनसभा को फोन के माध्यम से संबोधित कर कार्यकर्ताओं और जनता से संवाद किया तथा जल्द दोबारा उत्तराखंड आने का वादा किया।
राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे थे। सुबह वह पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे जहां से उन्हें हेलीकॉप्टर से अल्मोड़ा जाना था। लेकिन मौसम की गंभीर खराबी के कारण पायलट ने उड़ान भरने से इनकार कर दिया। इसके चलते अल्मोड़ा की जनसभा में उनका पहुंचना संभव नहीं हो सका। बाद में उनका दोपहर में प्रस्तावित गढ़वाल दौरा भी रद्द कर दिया गया और वह दिल्ली लौट गए। अल्मोड़ा की जनसभा को फोन से संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विदेश नीति को लेकर कहा कि भारत पर अमेरिका का दबाव बढ़ रहा है और यह तय किया जा रहा है कि भारत किस देश से तेल खरीदे और किससे नहीं। राहुल ने दावा किया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा और कृषि क्षेत्र संकट का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने जीएसटी को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि गलत तरीके से लागू की गई कर व्यवस्था से छोटे कारोबार प्रभावित हुए हैं, रोजगार के अवसर घटे हैं और व्यापार कुछ बड़े उद्योगपतियों तक सीमित होकर रह गया है। उन्होंने कहा कि नीतियां आम लोगों और किसानों के हित में नहीं बनाई जा रहीं। अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने अल्मोड़ा की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से निराश न होने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही उत्तराखंड आएंगे और लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं, उम्मीदों और प्रदेश के भविष्य पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
बाद में सोशल मीडिया पर जारी संदेश और वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि वह उत्तराखंड के लोगों से मिलकर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत करना चाहते थे। पौड़ी गढ़वाल में पूर्व सैनिकों से मुलाकात और कोटद्वार में दीपक कुमार के जिम जाने का भी कार्यक्रम था, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सभी कार्यक्रम स्थगित करने पड़े। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और वह जल्द फिर उत्तराखंड लौटेंगे।

उधर, राहुल गांधी के कोटद्वार दौरे के रद्द होने के बाद दीपक कुमार के जिम के बाहर तैनात पुलिस बल हटा लिया गया। हालांकि कोटद्वार कोतवाली परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। राहुल गांधी के दौरे को लेकर भाजपा ने भी तंज कसा। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है और राहुल गांधी का प्रस्तावित कार्यक्रम उसी सोच का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि राज्य और देश की जनता कांग्रेस की राजनीति को अच्छी तरह समझती है।
राहुल गांधी शुक्रवार को देहरादून में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिला और महानगर इकाइयों तथा अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। बैठक में 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति, संगठनात्मक तैयारियों और कार्यकर्ताओं से फीडबैक पर चर्चा की जाएगी। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रीतम सिंह, डॉ. हरक सिंह रावत और करन माहरा समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता उत्तराखंड पहुंच चुके हैं।
जनता से बोले राहुल-बहुत सी बातें करनी थीं, जल्द फिर आऊंगा
दौरा रद्द होने के बाद जारी संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें उत्तराखंड के लोगों से प्रदेश की वर्तमान स्थिति, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों, युवाओं के भविष्य और राज्य के विकास के मुद्दों पर चर्चा करनी थी। उन्होंने कहा कि पौड़ी गढ़वाल में पूर्व सैनिकों से महत्वपूर्ण बैठक और कोटद्वार में दीपक कुमार के जिम का दौरा भी प्रस्तावित था। राहुल ने कहा कि प्रकृति के आगे सभी को झुकना पड़ता है लेकिन इससे लोगों से मिलने की उनकी इच्छा कम नहीं होगी। उन्होंने जनता से वादा किया कि वह जल्द दोबारा उत्तराखंड आएंगे और पर्याप्त समय निकालकर लोगों के बीच संवाद करेंगे।

चार साल बाद उत्तराखंड पहुंचे राहुल, 2027 चुनावी तैयारियों पर रहेगा फोकस
राहुल गांधी का यह दौरा लगभग चार साल बाद उत्तराखंड में उनकी बड़ी राजनीतिक सक्रियता माना जा रहा है। कांग्रेस इसे 2027 विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बनाने की शुरुआत के रूप में देख रही है। शुक्रवार को देहरादून में होने वाली बैठक में संगठन की मजबूती, चुनावी रणनीति, बूथ स्तर की तैयारियों और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा होगी। पार्टी नेतृत्व जिला और महानगर इकाइयों से जमीनी फीडबैक भी लेगा, ताकि आगामी चुनावों के लिए संगठनात्मक खाका तैयार किया जा सके।










