प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर शनिवार को लाल किले की प्राचीर से अपने 13वें संबोधन में विकसित भारत का रोडमैप देश के सामने रखा। करीब 76 मिनट के संबोधन में उन्होंने नक्सलवाद, नागरिक सुरक्षा, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, खेल, सेमीकंडक्टर और दुर्लभ खनिजों से लेकर विनिर्माण और कृषि तक सरकार की प्राथमिकताएं गिनाईं। प्रधानमंत्री ने विकास के लिए सात शक्तियों-उत्पादन, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक एवं नवाचार, गतिशक्ति, रक्षा, ऊर्जा और सॉफ्ट पावर को सप्तधारा के रूप में सामने रखा।
नक्सलवाद खत्म, अब दिमागी नक्सलियों से सावधान
प्रधानमंत्री ने माओवाद-नक्सलवाद को चार दशक तक देश के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इसने कई परिवारों को बर्बाद किया और बड़ी आबादी को बंदूक की नोक पर दबाए रखा। नागरिकों की रक्षा में करीब साढ़े तीन हजार सुरक्षाबलों और पुलिसकर्मियों को जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि 2014 में सरकार बनने के बाद नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया गया था। अब देश इसे पूरी तरह खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं और धरती रक्तरंजित होती थी, वहां आज विश्वास, प्रयास और विकास का तिरंगा लहरा रहा है। मोदी ने साथ ही चेताया कि हथियार वाले नक्सल कमजोर पड़ गए हैं, लेकिन माओवादी सोच वाले लोग अब भी मौजूद हैं। उनके अनुसार, वर्षों तक ऐसी सोच रखने वाले लोगों ने सत्ता और सरकार की नीतियों को प्रभावित किया। उन्होंने इन्हें ‘दिमागी नक्सली’ बताते हुए पहचानने और अलग-थलग करने की अपील की।
नागरिक सुरक्षा का बनेगा बड़ा नेटवर्क
बदलती सुरक्षा जरूरतों के बीच देश में नागरिक सुरक्षा यानी सिविल डिफेंस का बड़ा नेटवर्क तैयार किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए इसकी क्षमताएं बढ़ाई जाएंगी और इसमें युवाओं की बड़ी भागीदारी होगी।
2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा
ऊर्जा सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री ने 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि पांच परमाणु भट्टियां शुरू करने का लक्ष्य लेकर सरकार आगे बढ़ रही है। समुद्र के भीतर तेल और गैस के अन्वेषण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले समुद्र तट के 99 प्रतिशत हिस्से को ‘नो गो एरिया’ घोषित किया गया था। अब इस क्षेत्र को अन्वेषण के लिए खोला गया है। इसी दिशा में समुद्र मंथन की घोषणा की गई और हाल में इसके लिए 85 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
दुर्लभ खनिजों पर भी जोर
प्रधानमंत्री ने मिशन क्रिटिकल मिनरल्स का उल्लेख करते हुए कहा कि एआई, सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीकों के लिए दुर्लभ खनिज महत्वपूर्ण हैं। भारत इनकी आपूर्ति सुरक्षा मजबूत करने के लिए काम कर रहा है और दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है।
एक साल में एक करोड़ से अधिक युवाओं को एआई कौशल
युवाओं के लिए प्रधानमंत्री ने अगले एक वर्ष में एक करोड़ से अधिक लोगों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कौशल देने का एलान किया। इसका उद्देश्य युवाओं को एआई के क्षेत्र में नेतृत्व के लिए तैयार करना है। हालांकि, प्रशिक्षण की प्रक्रिया, प्लेटफॉर्म, बैच और आवेदन की विस्तृत जानकारी अभी नहीं दी गई है।

छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग
बढ़ती कोचिंग संस्कृति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कई परिवारों को लगता है कि बच्चों को कोचिंग नहीं भेजा तो वे पीछे रह जाएंगे। इसे देखते हुए सरकार युवाओं के लिए निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क तैयार करेगी।
गांव-गांव होगी खेल प्रतिभा की खोज
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत खेलों में अपनी जगह बना रहा है। टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना, खेलो इंडिया, खेल प्रशिक्षण और खेल चिकित्सा से खिलाड़ियों के लिए अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत 2036 के ओलंपिक का मजबूत दावेदार बनकर उभर रहा है और 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में करीब 40 खेल और 350 स्पर्धाएं होती हैं, लेकिन भारत अभी इनमें से बड़ी संख्या में स्पर्धाओं में मौजूद नहीं है। इसे बदलने के लिए 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में प्रतिभा खोज अभियान चलाया जाएगा। गांव-गांव और स्कूल-स्कूल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा।
7-8 साल में पांच और सेमीकंडक्टर संयंत्र
आत्मनिर्भर भारत के तहत सेमीकंडक्टर उत्पादन को रणनीतिक प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक उपकरणों में चिप की जरूरत है और भारत को इसके लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में अब तीन सेमीकंडक्टर संयंत्र हैं और आने वाले 7-8 वर्षों में पांच और संयंत्र शुरू किए जाएंगे। उन्होंने आत्मनिर्भरता और वोकल फॉर लोकल को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
विकसित भारत के लिए सप्तधारा
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब नेक्स्ट लेवल रिफॉर्म की ओर बढ़ेगा। पारंपरिक व्यवस्था, सोच और लक्ष्यों में बदलाव के साथ किसान और मजदूरों को भी नई दिशा देनी होगी। उन्होंने अगले 5-7 वर्षों में उन कामों को गति देने का आह्वान किया, जो दशकों में नहीं हो सके।
उत्पादन शक्ति : वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत
सप्तधारा की पहली शक्ति उत्पादन है। प्रधानमंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के साथ पूरी वैल्यू चेन पर भारत की पकड़ मजबूत करने की जरूरत बताई। छोटे पुर्जों से लेकर बड़े उत्पाद तक देश में बनें और डिजाइन से उत्पादन तक भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखला का केंद्र बने।
उन्होंने गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारतीय उत्पाद वैश्विक मानकों पर खरे उतरें, उपयोगकर्ता के अनुकूल हों और जीरो डिफेक्ट उनकी पहचान बने।

कृषि और खाद्य प्रसंस्करण : किसान बनें वैश्विक ब्रांड
दूसरी शक्ति कृषि और खाद्य प्रसंस्करण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय कृषि उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचाना होगा। उन्होंने रसायन मुक्त खेती के साथ मिलेट्स, मसालों और भारतीय खान-पान को वैश्विक ब्रांड बनाने पर जोर दिया।
तकनीक और नवाचार : एआई से क्वांटम तक
तीसरी शक्ति तकनीक और नवाचार है। एआई, क्वांटम, अंतरिक्ष और डाटा सेंटर जैसी उभरती तकनीकों को भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार बताते हुए प्रधानमंत्री ने भारत को नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक तकनीक में भारत ने अपनी पहचान बनाई है और अब अगली पीढ़ी की संचार तकनीक में नेतृत्व करना होगा। मेड इन इंडिया तकनीक दुनिया के हर कोने तक पहुंचनी चाहिए।
गतिशक्ति : हाई स्पीड कनेक्टिविटी
चौथी शक्ति गतिशक्ति है। प्रधानमंत्री ने शहरों को हाई स्पीड ट्रेनों से जोड़ने, आधुनिक सड़कों और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डों को बेहतर तरीके से जोड़ना होगा। बंदरगाहों को विकास और आर्थिक वृद्धि के केंद्र के रूप में विकसित करने की भी जरूरत है।
रक्षा शक्ति : आत्मनिर्भरता जरूरी
पांचवीं शक्ति रक्षा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, आवश्यकता है। भारत को केवल रक्षा बाजार नहीं बल्कि निर्माता और निर्यातक बनना होगा। उन्होंने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक, साइबर सुरक्षा, ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणाली में क्षमता विकसित करने के साथ रक्षा उत्पादों की पूरी आपूर्ति शृंखला देश में तैयार करने पर जोर दिया।
ऊर्जा शक्ति : हरित ऊर्जा पर जोर
छठी शक्ति ऊर्जा है। प्रधानमंत्री ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती के बीच भारत हरित आंदोलन का वाहक बन रहा है। परमाणु ऊर्जा और समुद्री संसाधनों समेत विभिन्न क्षेत्रों में देश के पास आगे बढ़ने की क्षमता है।
सॉफ्ट पावर : दुनिया तक पहुंचे भारत की ताकत
सप्तधारा की सातवीं शक्ति भारत की सॉफ्ट पावर है। प्रधानमंत्री ने योग, आयुर्वेद, आस्था के केंद्रों, फिल्मों, हैंडलूम, गेमिंग, वीएफएक्स और डिजिटल सामग्री को भारत की वैश्विक ताकत बताया। उन्होंने कहा कि रचनात्मक क्षेत्र में भारत की क्षमता को दुनिया पहचान रही है और ऑडियो-वीडियो तथा मनोरंजन उद्योग में भी बड़े अवसर हैं। पर्यटन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास बड़ी वन संपदा और 100 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान हैं, लेकिन विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में अभी काफी संभावनाएं बाकी हैं। इस क्षमता का इस्तेमाल कर दुनिया को भारत की ओर आकर्षित करना होगा।
2047 के विकसित भारत की ओर बढ़ने का खाका
प्रधानमंत्री के संबोधन में सुरक्षा से लेकर अर्थव्यवस्था और तकनीक तक आत्मनिर्भरता पर जोर रहा। नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई, ऊर्जा सुरक्षा, सेमीकंडक्टर उत्पादन, एआई कौशल, खेल प्रतिभा और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच को उन्होंने विकसित भारत की व्यापक रणनीति से जोड़ा।











