लगातार बढ़ते तापमान, हीटवेव और जलवायु परिवर्तन के खतरे के बीच अब देहरादून को देश के चुनिंदा हीट रेजिलिएंट मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने देश के 12 शहरों का चयन इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए किया है, जिनमें देहरादून भी शामिल है। इस योजना का उद्देश्य शहरों को भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सक्षम बनाना है। नगर निगम देहरादून और एनआईयूए (National Institute of Urban Affairs) के बीच इस परियोजना को लेकर एमओयू प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में शहर के पार्कों, सड़क किनारे क्षेत्रों और सार्वजनिक परिसरों में ऐसे ढांचे विकसित किए जाएंगे जो लोगों को गर्मी से राहत देने में मदद करेंगे।
शहर में बढ़ेगा हरित क्षेत्र, बनेंगे कूल पब्लिक स्पेस
परियोजना के तहत शहर में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा। सड़क किनारे हरित पट्टियां विकसित होंगी और सार्वजनिक स्थलों पर छायादार स्थान बनाए जाएंगे। इसके अलावा, जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीकों और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं को भी शामिल किया जाएगा। नगर निगम का मानना है कि तेजी से बढ़ते कंक्रीट निर्माण और घटते हरित क्षेत्रों के कारण देहरादून में शहरी तापमान लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह योजना न केवल गर्मी के प्रभाव को कम करेगी बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार साबित होगी। नगर आयुक्त नमामी बंसल के अनुसार, परियोजना के तहत ऐसे सार्वजनिक स्थल विकसित किए जाएंगे जहां लोग अत्यधिक गर्मी के दौरान राहत महसूस कर सकें। इसमें शेड वाले वॉकवे, कूलिंग जोन, पेयजल सुविधाएं और हरित खुले क्षेत्र शामिल होंगे।
जल संरक्षण और सतत विकास पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के मैदानी और पहाड़ी शहरों में तापमान और अधिक बढ़ सकता है। ऐसे में शहरी विकास की योजनाओं में जल संरक्षण और हरित बुनियादी ढांचे को शामिल करना बेहद जरूरी हो गया है।
इस परियोजना के तहत वर्षा जल संचयन, जल निकायों के संरक्षण और प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने पर भी काम किया जाएगा। शहर में ऐसे निर्माण कार्यों को बढ़ावा देने की तैयारी है, जिनसे गर्मी का प्रभाव कम हो और ऊर्जा की खपत भी घटे।
लोगों के स्वास्थ्य पर भी रहेगा ध्यान
हीटवेव का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, बच्चों, मजदूरों और खुले में काम करने वाले लोगों पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस योजना में स्वास्थ्य सुरक्षा को भी प्रमुखता दी गई है। सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और गर्मी से बचाव संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। जरूरत पड़ने पर हीट अलर्ट सिस्टम और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया जाएगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते ऐसे कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में शहरी क्षेत्रों में हीट स्ट्रेस गंभीर समस्या बन सकता है।

क्या है हीट रेजिलिएंट सिटी?
हीट रेजिलिएंट सिटी ऐसे शहरों को कहा जाता है जो भीषण गर्मी और हीटवेव के प्रभावों को कम करने, सहन करने और उनसे जल्दी उबरने में सक्षम हों। इसमें शहरों की योजना इस तरह बनाई जाती है कि कंक्रीट और डामर से पैदा होने वाली अतिरिक्त गर्मी कम हो सके। इसके लिए शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाना, छायादार स्थान विकसित करना, जल संरक्षण करना, कूल रूफ तकनीक अपनाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना शामिल होता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को गर्मी से राहत देना और शहरों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाना है।
देश और दुनिया में कहां लागू हुआ यह मॉडल?
भारत में अहमदाबाद को हीट एक्शन प्लान लागू करने वाले शुरुआती शहरों में माना जाता है। वर्ष 2013 में अहमदाबाद नगर निगम ने भीषण गर्मी से निपटने के लिए विशेष हीट एक्शन प्लान शुरू किया था। इसमें हीट अलर्ट सिस्टम, सार्वजनिक जागरूकता अभियान, कूल रूफ तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने जैसे कदम शामिल किए गए। विभिन्न अध्ययनों में इसे सफल मॉडल माना गया है।
विदेशों की बात करें तो फ्रांस की राजधानी पेरिस और अमेरिका के लॉस एंजलिस जैसे शहर भी हीट रेजिलिएंट मॉडल पर काम कर रहे हैं। वहां सड़कों और इमारतों में गर्मी कम करने वाली सामग्री का उपयोग, कूल रूफ, मिस्टिंग सिस्टम, शहरी वन और जल संरक्षण योजनाएं लागू की गई हैं।










