कुछ दिन पहले तक कॉकरोच जनता पार्टी सिर्फ इंटरनेट पर चल रहा एक व्यंग्यात्मक मीम पेज माना जा रहा था। लेकिन देखते ही देखते यह सोशल मीडिया पर ऐसा ट्रेंड बन गया जिसने देश की राजनीति, युवाओं की नाराजगी और डिजिटल सेंसरशिप पर नई बहस छेड़ दी। कुछ ही दिनों में लाखों-करोड़ों फॉलोवर जुटाने वाले इस ऑनलाइन अभियान ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। इस पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से करते हुए कहा कि कुछ लोग नौकरी न मिलने से आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते हैं और सिस्टम पर हमला करना शुरू कर देते हैं। हालांकि, उन्होंने बाद में इस बयान का खंडन भी किया, कहाकि उनके बयान को तोड़मरोड़कर पेश किया गया। इसी संदर्भ को आधार बनाकर राजनीतिक कम्युनिकेशन से जुड़े अभिजीत दीपके ने व्यंग्य के रूप में कॉकरोच जनता पार्टी नाम से डिजिटल अभियान शुरू किया।
शुरुआत में यह सिर्फ मीम, व्यंग्य और बेरोजगारी-शिक्षा जैसे मुद्दों पर कटाक्ष करने वाला ऑनलाइन पेज था। लेकिन युवाओं ने इसे तेजी से शेयर करना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर ‘अगर हमें कॉकरोच कहा जा रहा है, तो हम वही सही’ जैसी लाइनें वायरल होने लगीं। अभिजीत दीपके ने बाद में इसे डिजिटल यूथ मूवमेंट का रूप दिया। इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व ट्विटर) और वेबसाइट के जरिए सदस्यता अभियान शुरू हुआ। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती तीन दिनों में ही लगभग 80 हजार लोगों ने जुड़ने में रुचि दिखाई। इसके बाद संगठन ने वेबसाइट और ऐप आधारित नेटवर्क तैयार किया। सोशल मीडिया पोस्ट, मीम, वीडियो और युवाओं से जुड़े मुद्दों ने इसे वायरल बना दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ ही दिनों में इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स लाखों से बढ़कर करोड़ों तक पहुंच गए। कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि पार्टी ने 1 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हासिल कर लिए थे और कुछ समय के लिए बड़े राजनीतिक दलों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी पीछे छोड़ दिया।

बेरोजगारी, परीक्षा लीक और सिस्टम से नाराजगी बना बड़ा कारण
कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने पोस्ट्स में बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और युवाओं की निराशा जैसे मुद्दे उठाए। संस्थापक अभिजीत दीपके ने कई इंटरव्यू और पोस्ट में कहा कि उन्हें इतनी बड़ी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी, लेकिन युवाओं के भीतर पहले से नाराजगी मौजूद थी। सोशल मीडिया पर पार्टी का व्यंग्यात्मक मैनिफेस्टो भी वायरल हुआ। जिसमें खुद को ऑनलाइन रहने वाला, निराश और सिस्टम से परेशान युवा बताकर जोड़ने की अपील की गई। कई प्लेटफॉर्म्स पर इसको लेकर भारी बहस छिड़ गई। जैसे-जैसे पार्टी का प्रभाव बढ़ा, वैसे-वैसे उस पर सवाल भी उठने लगे। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स और कुछ राजनीतिक नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के बड़ी संख्या में फॉलोअर्स पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की से हैं। कुछ लोगों ने इसे बॉट नेटवर्क से जोड़कर भी देखा।
जैसे-जैसे पार्टी का प्रभाव बढ़ा, वैसे-वैसे उस पर सवाल भी उठने लगे। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स और कुछ राजनीतिक नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के बड़ी संख्या में फॉलोअर्स पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की से हैं। कुछ लोगों ने इसे बॉट नेटवर्क से जोड़कर भी देखा। हालांकि, अभिजीत दीपके ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके प्लेटफॉर्म की लगभग 94 प्रतिशत ऑडियंस भारत से है। उन्होंने इसे नैरेटिव बनाने की कोशिश बताया।

एक्स हैंडल रोका गया, इंस्टाग्राम हैक और वेबसाइट बंद होने का आरोप
विवाद बढ़ने के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के आधिकारिक एक्स अकाउंट को भारत में रोक दिया गया। इसके बाद संगठन ने नया हैंडल शुरू किया, लेकिन संस्थापक का आरोप है कि उस पर भी कार्रवाई हुई। दीपके ने यह भी दावा किया कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर लिया गया और पार्टी की वेबसाइट भी बंद करा दी गई। उन्होंने इसे डिजिटल क्रैकडाउन और तानाशाही रवैया बताया। इसी बीच हरियाणा पुलिस और साइबर सेल ने फर्जी सदस्यता लिंक से सावधान रहने की एडवाइजरी भी जारी की। पुलिस के मुताबिक, कुछ साइबर अपराधी पार्टी के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर लोगों की बैंकिंग जानकारी चुराने की कोशिश कर रहे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने यह दिखाया कि आज सोशल मीडिया सिर्फ प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि राजनीतिक असंतोष का मंच भी बन चुका है। यह मामला इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि इंटरनेट आधारित व्यंग्यात्मक अभियान भी कुछ ही दिनों में बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस तरह के वायरल आंदोलनों में तथ्य और भावनात्मक प्रचार के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है।










