उत्तराखंड में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में लगभग दस गुना वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य सरकार इसे हरित विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि मान रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड अब स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में राज्य को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने यूपीईएस और साइंस एंड टेक्नोलॉजी पत्रिका की ओर से तैयार सौर ऊर्जा जागरूकता स्मारिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से हटकर नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ रही है और भारत भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ राज्यों को भी मिल रहा है और उत्तराखंड ने इन प्रयासों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्ष 2014 तक सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 32 मेगावाट थी लेकिन अब यह बढ़कर करीब 290 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। यह उपलब्धि राज्य सरकार की योजनाओं और लोगों की बढ़ती जागरूकता का परिणाम है।

सरकारी भवनों से गांवों तक बढ़ रहा सोलर नेटवर्क
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य सरकार विभिन्न सरकारी भवनों, स्कूलों, अस्पतालों और संस्थानों में रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर रही है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं। कई गांवों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट और अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं जिससे दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में ऊर्जा पहुंचाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन सौर ऊर्जा इस समस्या का प्रभावी समाधान बनकर सामने आई है। राज्य सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करें और पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम हो।
पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अहम कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता से समृद्ध राज्य है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण राज्य की प्राथमिकता है। सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ग्रीन उत्तराखंड का सपना तभी साकार होगा जब विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सौर ऊर्जा केवल पर्यावरण के लिए ही लाभकारी नहीं है बल्कि इससे आम लोगों के बिजली खर्च में भी कमी आती है। आने वाले समय में राज्य सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए और अधिक प्रोत्साहन देगी। इसके लिए सब्सिडी और तकनीकी सहायता जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है।

युवाओं और संस्थानों की भूमिका पर जोर
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने भी सौर ऊर्जा को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बताया। उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने युवाओं से इस क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास के लिए आगे आने की अपील की। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को भी ऊर्जा संरक्षण और हरित तकनीकों पर शोध को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और आम जनता मिलकर काम करें तो उत्तराखंड देश के अग्रणी ग्रीन एनर्जी राज्यों में शामिल हो सकता है।
ऊर्जा संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे बिजली की बचत करें और अपने दैनिक जीवन में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। यदि समाज का हर व्यक्ति ऊर्जा संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझे तो भविष्य में ऊर्जा संकट की संभावनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, यूपीईएस के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान सौर ऊर्जा से जुड़ी नई तकनीकों और योजनाओं पर भी चर्चा की गई।










