गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के एआईसीआरपी ऑन फॉरेज क्रॉप्स एंड यूटिलाइजेशन केंद्र को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की राष्ट्रीय समूह बैठक (खरीफ) के दौरान बेस्ट सेंटर अवॉर्ड (ICAR Best Centre Award) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान अयोध्या स्थित नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में आईसीएआर-आईजीएफआरआई, झांसी द्वारा प्रदान किया गया। यह पुरस्कार आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव ने सहायक महानिदेशक डॉ. एसके प्रधान, आईसीएआर-आईजीएफआरआई, झांसी के निदेशक डॉ. पंकज कौशल तथा अन्य अतिथियों की उपस्थिति में विश्वविद्यालय की चारा अनुसंधान टीम को प्रदान किया।
पंतनगर विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय समन्वित चारा फसल एवं उपयोगिता अनुसंधान परियोजना वर्ष 1995 से संचालित की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य चारा फसलों पर अनुसंधान को मजबूत करना और उन्नत तकनीकों का विकास एवं प्रसार करना है। उत्तराखंड में वर्तमान में हरे चारे की उपलब्धता में 46.75 प्रतिशत तथा सूखे चारे में 20.59 प्रतिशत की कमी बनी हुई है। ऐसे समय में विश्वविद्यालय ने चारा फसल सुधार और तकनीकी विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विश्वविद्यालय अब तक चारा लोबिया की 12, चारा जई की 4, बरसीम की 1 तथा चारा मक्का की 2 प्रजातियों सहित कुल 19 चारा फसल प्रजातियां विकसित कर चुका है। पिछले दो वर्षों में वैज्ञानिकों ने चारा मक्का की दो नई प्रजातियां, चारा लोबिया की एक तथा चारा जई की एक नई प्रजाति विकसित की है।
पिछले दो वर्षों में परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों द्वारा 28 शोध पत्र प्रकाशित किए गए हैं। साथ ही चारा जई में कटाई एवं नाइट्रोजन प्रबंधन तथा बरसीम में अधिक बीज उत्पादन के लिए कटाई प्रबंधन तकनीक विकसित की गई है। कार्यशाला के दौरान पंतनगर केंद्र ने चारा लोबिया और चारा मक्का से संबंधित दो पहचान प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए। सभी एआईसीआरपी परीक्षणों का शत-प्रतिशत सफल संचालन करने के लिए केंद्र की विशेष सराहना की गई। विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी उपलब्धि अंतर-प्रजातीय चारा मक्का संकर प्रजाति डीएफएच-2 का विकास और विमोचन माना जा रहा है।

इसे केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति द्वारा अधिसूचित कर बीज श्रृंखला में शामिल किया गया है। इसे विश्व की पहली अंतर-प्रजातीय चारा मक्का संकर प्रजाति माना जा रहा है, जो हरे एवं सूखे चारे के उत्पादन बढ़ाने और पशुधन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों डॉ. बिरेन्द्र प्रसाद, डॉ. नरेन्द्र कुमार सिंह एवं डॉ. क्रांति कुमार को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान उत्कृष्टता की बड़ी उपलब्धि बताया।










