उत्तराखंड विशेष कार्य बल (एसटीएफ) द्वारा नकली दवा माफियाओं के खिलाफ शुरू की गई आक्रामक मुहिम अब राष्ट्रीय स्तर पर असर दिखाने लगी है। उत्तराखंड से शुरू हुई तफ्तीश की कड़ियां जोड़ते हुए एसटीएफ ने बिहार के गया में एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जहां स्थानीय पुलिस के सहयोग से नकली दवाओं के काले कारोबार से जुड़े आठ शातिर आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में दो मुख्य सरगना विकास कुमार निवासी पिपरपांती और कुणाल कुमार निवासी मानपुर कर्मी टोला भी शामिल हैं, जिनकी तलाश उत्तराखंड एसटीएफ को लंबे समय से थी। यह दोनों आरोपित उत्तराखंड में दर्ज मुकदमों में वांछित चल रहे थे और एसटीएफ अब इन्हें बी-वारंट पर देहरादून लाकर पूछताछ करेगी। अधिकारियों का मानना है कि इनसे पूछताछ के बाद उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों में फैले इस सिंडिकेट के पूरे सप्लाई चेन और इससे जुड़े बड़े मेडिकल कारोबारियों के नामों का पर्दाफाश होगा।
यह गिरोह देश की जानी-मानी फार्मास्युटिकल कंपनियों की जीवनरक्षक दवाओं की हूबहू नकल तैयार कर बाजार में बेच रहा था। यह नेटवर्क केवल पैकेजिंग की नकल नहीं कर रहा था बल्कि दवाओं का रंग, आकार और छपाई इस बारीकी से की जाती थी कि अनुभवी मेडिकल स्टोर संचालक भी असली और नकली में अंतर नहीं कर पाते थे। इस पूरे नेटवर्क का राजफाश पिछले सप्ताह उत्तराखंड एसटीएफ द्वारा दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद हुआ था। जांच के दौरान कोटद्वार में स्थित एक अवैध फैक्ट्री को सील किया गया, जबकि रुड़की स्थित एक अन्य संदिग्ध इकाई से नमूने लेकर परीक्षण के लिए भेजे गए। यहीं से अधिकारियों को सुराग मिला कि यह कोई स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक बड़ा संगठित नेटवर्क है, जिसके तार सीधे बिहार से जुड़े हुए हैं। फिलहाल एसटीएफ की टीमें इस रैकेट से जुड़े अन्य मददगारों की तलाश में जुटी हैं और आने वाले दिनों में कई अन्य राज्यों के दवा बाजारों में भी बड़े स्तर पर छापेमारी की तैयारी की जा रही है।










