प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देशभर के खिलाड़ियों, समाजसेवियों, शिक्षकों और युवाओं के प्रेरणादायक कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की ताकत बताया। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने हाल ही में झारखंड के रांची में आयोजित राष्ट्रीय वरिष्ठ एथलेटिक्स प्रतियोगिता में बने नए राष्ट्रीय रिकॉर्डों से की। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से 100 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले गुरिंदर वीर सिंह और अनिमेष कुजूर से बातचीत की। दोनों खिलाड़ियों ने बताया कि सीमित संसाधनों और लोगों की शंकाओं के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी। पीएम मोदी ने कहा कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और टीम भावना ही खिलाड़ियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय एथलीट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाएंगे।
गर्मी के मौसम का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से स्वास्थ्य का ध्यान रखने और पर्याप्त पानी पीने की अपील की। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित पारंपरिक पेयों जैसे आम पन्ना, लस्सी, छाछ, सत्तू शरबत, कोकम शरबत, सोल कढ़ी और बेल पना का उल्लेख करते हुए कहा कि ये केवल पेय पदार्थ नहीं बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। कार्यक्रम में आमों की विविधता भी चर्चा का विषय रही। प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के हापुस (अल्फांसो), गुजरात के केसर, उत्तर प्रदेश के दशहरी और लंगड़ा, बिहार के जर्दालु तथा दक्षिण भारत के बंगनपल्ली और तोतापुरी आमों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय किसान अब इन उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचा रहे हैं, जिससे कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।
पीएम मोदी ने केरल के अलुवा निवासी साजी वलासेरिल की सराहना की, जिन्होंने नदी में तैराकी सिखाने का अनूठा अभियान शुरू किया है। अब तक 15 हजार से अधिक लोग उनके प्रयासों से तैरना सीख चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा भावना और दृढ़ संकल्प से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने हाल ही में नीदरलैंड से भारत लौटाई गई चोलकालीन ताम्रपट्टियों का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि ये प्राचीन ताम्रपत्र भारत की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और चोल साम्राज्य की समुद्री शक्ति के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के मल्हार में मिली 1400 से 1500 वर्ष पुरानी ताम्रपट्टियों को भी उन्होंने भारतीय इतिहास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

युवाओं में बढ़ती खगोल विज्ञान की रुचि पर खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री ने विभिन्न एस्ट्रोनॉमी क्लबों और संस्थाओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने छात्रों और युवाओं से अवकाश के दौरान तारामंडलों और खगोल विज्ञान क्लबों का भ्रमण करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश में गंगा डॉल्फिन बचाव अभियान का भी उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत संचालित विशेष गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस की मदद से एक डॉल्फिन को लगभग 13 घंटे के प्रयास के बाद सुरक्षित बचाया गया और राप्ती नदी में छोड़ा गया। उन्होंने कहा कि डॉल्फिन संरक्षण, गंगा की जैव विविधता और नदी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री ने बस्ती जिले में मनोरमा नदी की सफाई में जुटे युवाओं तथा गोवा के सेवानिवृत्त शिक्षक बालकृष्ण अय्या के जल संरक्षण प्रयासों की भी सराहना की। वहीं तमिलनाडु की शिक्षिका गिरिजा अम्मा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उनके विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रतिदिन एक-एक रुपया जमा कर करीब 40 लाख रुपये सैनिकों के कल्याण के लिए एकत्र किए। कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के हर कोने में ऐसे अनेक लोग हैं जो समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक कार्य कर रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से ऐसे प्रयासों को पहचानने, प्रोत्साहित करने और उनमें भागीदारी निभाने की अपील की।










