केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के 6 जांबाज सैनिकों के नामों की पहली बार आधिकारिक घोषणा की है। पिछले साल मई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत करने के लिए चलाए गए इस बेहद संवेदनशील और संयुक्त सैन्य अभियान में भारत के ये वीर सपूत शहीद हुए थे।
अब तक सरकार और सैन्य हलकों की ओर से इस ऑपरेशन में हुए नुकसान को लेकर आधिकारिक तौर पर चुप्पी साधी गई थी लेकिन नेशनल वॉर मेमोरियल (राष्ट्रीय समर स्मारक) के रोल ऑफ ऑनर (सम्मान सूची) में इन नामों को शामिल किए जाने के साथ ही देश के लिए जान न्योछावर करने वाले इन वीर जवानों की शहादत की पहली आधिकारिक पुष्टि हो गई है। इन सभी अमर शहीदों के नाम मेमोरियल की वॉल 3D के उस विशेष सेक्शन में उकेरे गए हैं जो देश की संप्रभुता के लिए प्राणों की आहुति देने वाले नायकों को समर्पित है।

ऑपरेशन सिंदूर में शहीद सैनिकों की लिस्ट
- हेडक्वार्टर 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड के सूबेदार मेजर पवन कुमार।
- 4 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र)।
- 5 फील्ड रेजिमेंट के लांस नायक दिनेश कुमार।
- 851 लाइट रेजिमेंट के एविएशन टेक्नीशियन मूड मुरलीनाइक।
- 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी के हवलदार सुनील कुमार सिंह।
- 39 विंग के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायु सेना मेडल) शामिल हैं।
संयुक्त थिएटर ऑपरेशन था सिंदूर
इस सूची के सार्वजनिक होने से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना का एक बेहद रणनीतिक और संयुक्त थियेटर ऑपरेशन था। इस ऑपरेशन की वीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें शामिल राइफलमैन सुनील कुमार को थलसेना में उनकी असाधारण बहादुरी के लिए वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायुसेना में उनके अदम्य साहस के लिए वायु सेना पदक से सम्मानित किया गया है।
नेशनल वॉर मेमोरियल का गौरव
वर्ष 2019 में नई दिल्ली के इंडिया गेट परिसर के समीप स्थापित नेशनल वॉर मेमोरियल देश की आजादी के बाद से अब तक के सभी सैन्य संघर्षों के शहीदों को नमन करता है। इन छह नए नामों के जुड़ने के साथ ही ऑपरेशन सिंदूर को भी अब औपचारिक तौर पर राष्ट्रीय इतिहास और स्मारक में दर्ज कर लिया गया है।
पहलगाम हमले का प्रतिशोध था ऑपरेशन सिंदूर

यह ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई कश्मीर के पहलगाम में हुए एक दर्दनाक आतंकी हमले के जवाब में शुरू की गई थी। 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने पहलगाम में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया था जिसमें 26 आम नागरिकों की मौत हो गई थी। मृतकों में अधिकांश देश के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यटक थे। इस हमले का बदला लेने और आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए 7 मई 2025 की सुबह ऑपरेशन सिंदूर का बिगुल फूंका गया। भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमा पार पाकिस्तान और नियंत्रण रेखा के पार पीआके में सक्रिय आतंकवाद के 9 प्रमुख ठिकानों पर बेहद सटीक हवाई और जमीनी हमले किए। इस कार्रवाई में मुख्य रूप से प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के लॉन्च पैड्स और उनके बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया गया।
चार दिनों का कड़ा संघर्ष और युद्धविराम
भारत के इस आक्रामक रुख के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर भारी तनाव देखा गया और यह संघर्ष लगभग चार दिनों तक चला। आखिरकार, दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स के स्तर पर हुई हॉटलाइन बातचीत और कूटनीतिक हस्तक्षेप के बाद, 10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई को रोकने (सीजफायर) पर सहमत हुए थे। इसी ऐतिहासिक और सफल ऑपरेशन में भारत ने अपने इन 6 वीर जवानों को खोया था, जिन्हें आज पूरा देश नमन कर रहा है।










