पिथौरागढ़ के लक्ष्मण सिंह महार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की बीबीए छात्रा मानसी कापड़ी ने पारंपरिक ऐपन कला को उद्यम का रूप देकर युवा उद्यमिता की नई मिसाल पेश की है। देवभूमि उद्यमिता योजना से मिले प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग के बल पर उन्होंने होमीज वाइब्स नाम से अपना उद्यम शुरू किया। उनके नवाचारी प्रयासों को फरवरी 2025 में आयोजित देवभूमि उद्यमिता स्टार्टअप मेगा इवेंट में 75 हजार का सीड फंड भी मिला, जिससे उन्होंने अपने व्यवसाय के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए।
लक्ष्मण सिंह महार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की बीबीए छात्रा मानसी कापड़ी ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर पारंपरिक कला भी सफल उद्यम का आधार बन सकती है। उत्तराखण्ड की पारंपरिक ऐपन कला को व्यवसायिक स्वरूप देकर उन्होंने युवा उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। मानसी की उद्यमिता यात्रा वर्ष 2024 में शुरू हुई, जब उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड सरकार और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), अहमदाबाद के सहयोग से संचालित देवभूमि उद्यमिता योजना (DUY) के द्विदिवसीय बूटकैंप में भाग लिया। वर्ष 2023 से राज्य के 119 राजकीय महाविद्यालयों और पांच विश्वविद्यालयों में संचालित यह योजना विद्यार्थियों को नवाचार और उद्यमिता की ओर प्रेरित कर रही है।
बचपन से ही ऐपन कला में रुचि रखने वाली मानसी विभिन्न पारंपरिक डिज़ाइन तैयार करती थीं, लेकिन यह केवल उनका शौक था। बूटकैंप के दौरान उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि कला और हुनर को व्यवसाय में कैसे बदला जा सकता है। उन्होंने अपने ऐपन कार्य को एक बिजनेस आइडिया के रूप में प्रस्तुत किया और बिजनेस मॉडल कैनवास के माध्यम से उसकी रूपरेखा तैयार कर निर्णायकों के समक्ष प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
उनके विचार और उद्यमिता की स्पष्ट दृष्टि को देखते हुए उनका चयन 12 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) के लिए किया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने ब्रांडिंग, पैकेजिंग, लेबलिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग, ऑनलाइन बिक्री, उद्यम पंजीकरण, विपणन प्रबंधन और व्यवसाय संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं। प्रशिक्षण और मेंटर डॉ. रुचिता पंघुरिया के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर मानसी ने ‘होमीज़ वाइब्स’ नाम से अपना उद्यम शुरू किया। उनके प्रयासों को फरवरी 2025 में आयोजित देवभूमि उद्यमिता स्टार्टअप मेगा इवेंट में बड़ी सफलता मिली जब उनके उद्यम को 75 हजार का सीड फंड प्रदान किया गया। इस राशि का उपयोग उन्होंने उत्पाद विकास, व्यवसाय विस्तार और विपणन गतिविधियों में किया।

वर्तमान में मानसी का उद्यम पारंपरिक ऐपन कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने का सफल माध्यम बन चुका है। वह प्रतिवर्ष करीब 80 हजार मूल्य के ऐपन उत्पादों की बिक्री कर रही हैं और लगातार अपने ग्राहक आधार का विस्तार कर रही हैं। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग के माध्यम से स्थानीय कला और पारंपरिक ज्ञान को रोजगार और स्वरोजगार के प्रभावी साधन में बदला जा सकता है।
जानिए देवभूमि उद्यमिता योजना के बारे में
उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग की देवभूमि उद्यमिता योजना सितंबर 2023 में शुरू की गई पांच वर्षीय पहल है। इसका उद्देश्य युवाओं को नौकरी खोजने वाला नहीं बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद के सहयोग से संचालित इस योजना के तहत राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत कृषि, हस्तशिल्प, पर्यटन, एग्रो-प्रोसेसिंग, आयुष, ड्रोन तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स , नवीकरणीय ऊर्जा और सौर ऊर्जा समेत 12 प्रमुख क्षेत्रों में उद्यम आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को बूटकैंप, उद्यमिता विकास प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, बाजार संपर्क, ब्रांडिंग, पैकेजिंग सहायता और सीड फंडिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
हमारी सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल रोजगार प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। इसी क्रम में देवभूमि उद्यमिता योजना के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में उद्यमिता की संस्कृति विकसित की जा रही है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित उद्यमों को बढ़ावा देकर हम रोजगार के नए अवसर सृजित कर रहे हैं, जिससे पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिल रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड











