पीएम मोदी ने मंगलवार को 11963 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 213 किलोमीटर लंबे बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का विधिवत लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने देवभूमि में प्लास्टिक व कूड़े के ढेर पर चिंता भी जताई। स्थानीय लोगों के अलावा पर्यटकों से भी स्वच्छता की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवभूमि की भौगोलिक और आध्यात्मिक महत्व को बताते हुए कहा कि इन पवित्र स्थानों की गरिमा बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह यहां रहने वाले स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले हर पर्यटक का सामूहिक कर्तव्य है। कहा, हमारे पहाड़, ये वन क्षेत्र और यह देवभूमि हमारी अनमोल धरोहर है। यह बहुत ही पवित्र स्थान है और इसकी मर्यादा को बनाए रखना हम सभी का परम कर्तव्य है।
पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को नसीहत
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उन लोगों को संबोधित किया जो तीर्थाटन या पर्यटन के उद्देश्य से उत्तराखंड आते हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जो प्लास्टिक और कूड़ा-कचरा इन क्षेत्रों में छोड़ दिया जाता है वह केवल गंदगी नहीं है बल्कि इस भूमि की पवित्रता को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। प्रधानमंत्री का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब राज्य में चारधाम यात्रा और पर्यटन गतिविधियों में भारी वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और सफाई मित्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जब तक जन-भागीदारी नहीं होगी, तब तक पूर्ण स्वच्छता का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन है।
पीएम मोदी ने जीता उत्तराखंड का दिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अपने चिर-परिचित पहाड़ी अंदाज में नजर आए। सिर पर प्रतिष्ठित ब्रह्मकमल टोपी और जुबां पर गढ़वाली-कुमाऊंनी के शब्द-प्रधानमंत्री ने अपनी वेशभूषा और भाषा शैली से यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड उनके दिल के कितना करीब है। मंच से जब उन्होंने स्थानीय बोलियों में जनता को संबोधित किया तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत किसी औपचारिक संबोधन से नहीं बल्कि पहाड़ के अपनों को याद करते हुए की। उन्होंने भुला-भुलियों (छोटे भाई-बहन), सयाणा, आमा (दादी) और बाबा (दादा) जैसे शब्दों का प्रयोग कर हर उम्र के व्यक्ति से भावनात्मक जुड़ाव बनाया। स्थानीय बोली के इन छोटे-छोटे वाक्यों ने जनता और देश के प्रधानसेवक के बीच की दूरी को पल भर में खत्म कर दिया।
आस्था और विकास का अद्भुत संगम
पीएम मोदी ने एक्सप्रेस-वे के निर्माण को केवल एक ढांचागत उपलब्धि नहीं बल्कि दैवीय कृपा बताया। उन्होंने विशेष रूप से मां डाटकाली के आशीर्वाद का जिक्र करते हुए कहा कि देहरादून पर मां की असीम कृपा है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे संतला माता मंदिर का स्मरण कर दोनों राज्यों के सांस्कृतिक सेतु को मजबूती दी। अपने संबोधन में उन्होंने उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान को पिरोते हुए कहा कि हरिद्वार कुंभ से लेकर नंदा राजजात और पंच बदरी, पंच केदार व पंच प्रयाग तक यह धरती केवल भूगोल नहीं बल्कि भारत की चेतना का केंद्र है।
मुख्यमंत्री धामी की थपथपाई पीठ
प्रधानमंत्री ने राज्य में हो रहे विकास कार्यों की गति को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जमकर तारीफ की। उन्होंने एक्सप्रेस-वे और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन के लिए युवा मुख्यमंत्री के नेतृत्व को सराहा। पीएम ने विश्वास जताया कि डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड को आने वाले दशक का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
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