मानव-वन्यजीव संघर्ष : कुमाऊं मंडल में वन्यजीवों के बढ़ते हमलों ने जनजीवन को दहशत में डाल दिया है। बीते 60 दिनों के भीतर बाघ, तेंदुआ और भालू के हमलों में 10 लोगों की जान जा चुकी है। कई लोग घायल हैं। खेतों, जंगलों और गांवों की सीमाओं तक वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को गंभीर चुनौती बना दिया है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 12 नवंबर 2025 से 12 जनवरी 2026 के बीच चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और उधमसिंह नगर जिलों में हमलों की घटनाएं दर्ज की गईं। अधिक प्रभावित वे ग्रामीण हैं जो रोजमर्रा के काम के लिए जंगल या खेतों का रुख करते हैं। कई मामलों में सुबह या शाम के समय मवेशी चराने गए लोग वन्यजीवों का शिकार बने।

कहीं बुजुर्गों को खेतों में काम करते समय निशाना बनाया गया, तो कहीं महिलाएं चारा और लकड़ी लेने जंगल गईं और तेंदुए का शिकार हो गईं। कुछ इलाकों में भालू के हमलों ने भी ग्रामीणों की जान ली। इन घटनाओं के बाद कई गांवों में लोग अकेले बाहर निकलने से डरने लगे हैं। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में भय के साथ आक्रोश भी बढ़ रहा है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वन्यजीवों की आवाजाही की जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। कई गांवों में पिंजरे लगाए गए, लेकिन उनका असर सीमित रहा। ग्रामीणों ने संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त, पर्याप्त रोशनी, अलर्ट सिस्टम और त्वरित मुआवजा देने की मांग उठाई है।








