उत्तराखंड सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को अधिक लाभकारी और संगठित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक चकबंदी नीति की अधिसूचना जारी कर दी है। 1 जून 2026 को जारी स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026 की अधिसूचना के मुताबिक, पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी हुई कृषि जोतों को एकीकृत कर आधुनिक कृषि, बागवानी और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि छोटे-छोटे और अलग-अलग स्थानों पर फैले खेतों के कारण खेती महंगी और कम उत्पादक हो जाती है जबकि चकबंदी से खेती की लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ेगी।
नीति के अनुसार प्रत्येक पर्वतीय जिले में चरणबद्ध तरीके से गांवों का चयन किया जाएगा। चकबंदी के लिए न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि अथवा कम से कम 25 खातेदारों की लिखित सहमति आवश्यक होगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि चयनित गांव विवाद रहित होने चाहिए ताकि प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी हो सके। सरकार ने चकबंदी को किसान-केंद्रित और स्वैच्छिक स्वरूप दिया है। इच्छुक किसान निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। योजना के तहत तैयार प्रस्तावों पर आने वाली आपत्तियों का निस्तारण 120 दिनों के भीतर किया जाएगा। भूमि अभिलेखों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जीपीएस, जीआईएस मैपिंग और ड्रोन सर्वेक्षण जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
पर्वतीय क्षेत्रों में अलग से चकबंदी स्टाफ की कमी को देखते हुए शासन ने राजस्व अधिकारियों को ही चकबंदी संबंधी शक्तियां सौंप दी हैं। जिलाधिकारी को जिला उप संचालक चकबंदी, अपर जिलाधिकारी को उप संचालक चकबंदी, एसडीएम को बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी तथा तहसीलदार को चकबंदी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी स्तर तक शक्तियों का हस्तांतरण किया गया है। नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू गोलखातों और संयुक्त स्वामित्व वाली भूमि की समस्या का समाधान है। इसके तहत काश्तकारों को गोलखातों से मुक्त कर व्यक्तिगत नामों पर संहत खेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। साथ ही खेतों में स्थित पेड़, कुएं या अन्य निर्माणों का बाजार मूल्यांकन कर समुचित प्रतिकर का प्रावधान भी किया गया है।

शासन ने चकबंदी को आकर्षक बनाने के लिए कई प्रोत्साहन घोषित किए हैं। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का विशेष कॉर्पस फंड बनाया गया है। कृषि, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और सिंचाई विभाग की योजनाओं में किसानों के अंशदान का भुगतान इसी फंड से किया जा सकेगा। स्वरोजगार योजनाओं में 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा। चकबंदी पूर्ण होने के बाद गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, सौर ऊर्जा, सामुदायिक भवन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए पूरे चक क्षेत्र की सामूहिक तारबंदी या सोलर फेंसिंग भी कराई जाएगी। मनरेगा के माध्यम से खेतों की मेढ़बंदी तथा अन्य विकास कार्यों को भी जोड़ा गया है।
सरकार विशेषीकृत क्लस्टर खेती को भी बढ़ावा देगी। समान जलवायु और मिट्टी वाले क्षेत्रों में बागवानी, मसाला उत्पादन, औषधीय पौधों और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों की सामूहिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। उत्पादों के विपणन के लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से बाजार संपर्क उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक की सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर मिलेंगी।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चाधिकार समिति, कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति तथा जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति गठित की गई है। अगले पांच वर्षों में 11 पर्वतीय जिलों के 275 गांवों में चकबंदी पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। शासन ने यह भी तय किया है कि नीति लागू होने के तीन वर्ष बाद स्वतंत्र एजेंसी से इसका प्रभाव मूल्यांकन कराया जाएगा।
10 बड़ी बातें
- जून 2026 को स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी नीति का जीओ जारी।
- पांच वर्षों में 275 गांवों में चकबंदी का लक्ष्य।
- न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि या 25 खातेदारों की सहमति जरूरी।
- 100 करोड़ रुपये का विशेष कॉर्पस फंड बनाया गया।
- किसानों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलेगा।
- जीपीएस, जीआईएस और ड्रोन सर्वे से डिजिटल अभिलेख तैयार होंगे।
- गोलखातों से मुक्ति और व्यक्तिगत नाम पर संहत खेत की व्यवस्था।
- सामूहिक तारबंदी/सोलर फेंसिंग की सुविधा।
- एफपीओ के माध्यम से बाजार संपर्क और क्लस्टर खेती को बढ़ावा।
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चाधिकार समिति निगरानी करेगी।
किस अधिकारी को मिली कौन-सी जिम्मेदारी
- जिलाधिकारी : जिला उप संचालक चकबंदी
- अपर जिलाधिकारी : उप संचालक चकबंदी
- एसडीएम : बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी
- तहसीलदार : चकबंदी अधिकारी
- नायब तहसीलदार : सहायक चकबंदी अधिकारी
- राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) : चकबंदीकर्ता
- राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी) : चकबंदी लेखपाल
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