उत्तराखंड में दालचीनी की खेती, सतत उत्पादन और कटाई उपरांत तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 11–12 जून 2026 को सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सुगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का विषय है-दालचीनी: प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार। संस्थान के अनुसार उत्तराखंड में सुगंधित फसलों की खेती लगातार विस्तार कर रही है। राज्य सरकार की महक क्रांति नीति 2026–36 के तहत सुगंधित कृषि क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में चंपावत और नैनीताल जिलों में लगभग 5,200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिनेमन वैली विकसित की जा रही है, जिससे किसानों, उद्यमियों और उद्योगों के लिए नए अवसर सृजित होंगे।
किसानों और उद्योग के बीच बनेगा सेतु
सेमिनार का उद्देश्य दालचीनी की व्यावसायिक खेती को प्रोत्साहित करना, किसानों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना, अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों और कृषकों के बीच समन्वय स्थापित करना तथा गुणवत्ता आधारित उत्पादन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में खाद्य सुरक्षा मानकों, निर्यात आवश्यकताओं और दालचीनी आधारित उद्यमिता पर भी विशेष चर्चा होगी।
श्रीलंका और इंडोनेशिया के विशेषज्ञ देंगे मार्गदर्शन
कार्यक्रम में श्रीलंका के नेशनल सिनेमन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर तथा इंडोनेशिया के रिसर्च सेंटर फॉर एस्टेट क्रॉप्स के विशेषज्ञ भाग लेंगे। इसके अलावा भारत के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे स्पाइसेज बोर्ड ऑफ इंडिया, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पाइसेज रिसर्च, फूड सेफ्टि एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और AIIMS ऋषिकेश के विशेषज्ञ भी अपने अनुभव साझा करेंगे।

छह तकनीकी सत्र होंगे आयोजित
दो दिवसीय आयोजन में छह प्रमुख विषयों पर तकनीकी सत्र होंगे, जिनमें उन्नत प्रवर्धन तकनीकें, वैश्विक बाजार अध्ययन, सर्वोत्तम कृषि पद्धतियां, मधुमेह में दालचीनी की उपयोगिता, पोस्ट-हार्वेस्ट एवं मूल्य संवर्धन तकनीकें तथा विपणन एवं निर्यात नवाचार शामिल हैं। प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और हैंड्स-ऑन सत्रों का भी अवसर मिलेगा।
प्रदर्शनी में दिखेंगे दालचीनी उत्पाद
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न देशों की दालचीनी की छाल, पाउडर और उनसे तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इससे प्रतिभागियों को विभिन्न किस्मों की पहचान, गुणवत्ता, सुगंध और व्यावसायिक मानकों की जानकारी प्राप्त होगी।
किसानों को होंगे कई लाभ
आयोजकों का मानना है कि इस सेमिनार से किसानों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और उद्यमियों को नवीनतम अनुसंधान, बाजार संभावनाओं, सरकारी योजनाओं, मूल्य संवर्धन, स्टार्टअप अवसरों और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से संवाद का लाभ मिलेगा। साथ ही उत्तराखंड को दालचीनी उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।










