Uttarakhand Natural Farming : राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने बड़ा प्रयोग शुरू किया है। प्रदेश के 11 जिलों में करीब 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है। हालांकि इसकी वास्तविक उत्पादकता और प्रभाव का पता फसल तैयार होने के बाद ही चलेगा। यह जानकारी कृषि मंत्री गणेश जोशी ने विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी। कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार की राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना के तहत राज्य के चयनित जिलों में यह पहल शुरू की गई है। इसके तहत किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बजाय जैविक और पारंपरिक तरीकों से खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ ही उन्हें आवश्यक तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे कम लागत में टिकाऊ खेती कर सकें।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के विपणन की भी व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए राज्य में 337 आउटलेट स्थापित करने की योजना बनाई गई है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार मिल सके। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को भी रसायनमुक्त खाद्य उत्पाद उपलब्ध होंगे। विधानसभा में कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 में जून से अगस्त के बीच हुई अतिवृष्टि के कारण प्रदेश में 13,291 हेक्टेयर क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है। इसमें लगभग 700.92 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र और 12,590.22 हेक्टेयर में बागवानी फसलों को नुकसान हुआ है। धान, मक्का और अन्य फसलों के साथ ही बागवानी क्षेत्र भी इससे प्रभावित हुआ।

सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए मुआवजा प्रक्रिया भी शुरू की है। प्राकृतिक आपदा के मानकों के अनुसार किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 1,813 किसानों को करीब 44 लाख रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। इसके अलावा फसल बीमा योजना के तहत भी प्रभावित किसानों को राहत दी जा रही है। कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से केंद्र सरकार से 25 करोड़ रुपये की सहायता मिली है। इस राशि का उपयोग खेतों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग और अन्य उपायों पर किया जाएगा, ताकि किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को टिकाऊ बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ ही बाजार व्यवस्था, राहत योजनाएं और फसल सुरक्षा जैसे उपायों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले समय में प्राकृतिक खेती के परिणाम सामने आने के बाद इस योजना को और व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।









