Uttarakhand के सरकारी और अशासकीय विद्यालयों में 22 मई से प्रस्तावित मासिक परीक्षाओं को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं। संघ का कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को अब तक सभी विषयों की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। ऐसे में परीक्षा आयोजित करना बच्चों के साथ अन्याय होगा। संघ ने मांग की है कि पहले सभी विद्यालयों में पूरी किताबें उपलब्ध कराई जाएं, उसके बाद ही परीक्षा कार्यक्रम लागू किया जाए।
शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कई विद्यालयों में पुस्तक वितरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। कहीं कुछ विषयों की किताबें पहुंची हैं तो कहीं छात्र अब भी पूरी पाठ्य सामग्री का इंतजार कर रहे हैं। इसका असर सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई और उनकी तैयारी पर पड़ रहा है। संघ का कहना है कि जब छात्र पूरे पाठ्यक्रम का अध्ययन ही नहीं कर पाए हैं तो उनसे परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।
विभागीय कार्यक्रम के अनुसार 22 और 23 मई को पहली मासिक परीक्षा आयोजित की जानी है। इसके बाद जुलाई, अगस्त, नवंबर और दिसंबर में भी चरणबद्ध परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। शिक्षक संघ का कहना है कि मासिक परीक्षा व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जाएगी जब सभी बच्चों को समान रूप से अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो। वर्तमान हालात में कई विद्यालय बुनियादी शैक्षणिक संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। संघ ने यह भी कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों पर लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों का दबाव बढ़ रहा है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि यदि समय पर किताबें उपलब्ध नहीं होंगी और शिक्षकों को अतिरिक्त कार्यों में लगाया जाएगा तो इसका असर सीधे छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा। संघ ने विभाग से शैक्षणिक वातावरण को प्राथमिकता देने की मांग की है।

प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों ने कहा कि विभाग को परीक्षा कार्यक्रम लागू करने से पहले जमीनी स्थिति का आकलन करना चाहिए। कई विद्यालयों में छात्र अभी तक पूरी तरह पढ़ाई शुरू नहीं कर पाए हैं। ऐसे में जल्दबाजी में परीक्षा कराने का निर्णय शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों को नजरअंदाज करना होगा।
तीन माह से वेतन का इंतजार
अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिलने का मामला भी तूल पकड़ता जा रहा है। शिक्षकों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ रही है। शिक्षक संगठनों ने विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर जल्द भुगतान की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चेतावनी दी गई है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।










