Bihar Chunav 2025 में एनडीए की आंधी चली है। महागठबंधन धराशायी हो गया है। इस तरह की जीत की कल्पना न एनडीए ने की होगी न इस तरह हार की कल्पना महागठबंधन ने की होगी। दोपहर के तीन बजे से एनडीए 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए रखे था। महागठबंधन की हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद तेजस्वी जीत के लिए जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं। कई राउंड में वह पीछे रह चुके हैं। एनडीए में शामिल बीजेपी 101, जदयू 101 चिराग पासवान की पार्टी LJP (रामविलास) 29, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM 6 और जीतन राम मांझी की पार्टी हम भी 6 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। वहीं महागठबंधन में शामिल RJD 143, कांग्रेस 61, वाम दल 30 और VIP 9 सीटों पर अधिकारिक तौर से मैदान में है। इसके अलावा कुछ सीटों पर महागठबंधन की फ्रेडली फाइट है, जिसमें चैनपुर, करगहर, नरकटियागंज, सिकंदरा, कहलगांव और सुल्तानगंज सीटें शामिल हैं। जिसमें एनडीए को 204 सीटें और महागठबंधन को महज 32 सीटें आई हैं।
इस बार यहां चुनाव इसलिए खास रहे क्योंकि यहां नीतीश कुमार लंबे समय से सत्ता में हैं। वे 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। बाद के वर्षों में उन्होंने गठबंधन बदले, लेकिन सत्ता उनके इर्द-गिर्द ही रही। अब तक वे कुल नौ बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। 2020 के बाद से ही वे तीन बार शपथ ले चुके थे। अब 10वीं बार की तैयारी में हैं। इस बार चुनाव में बड़ा सवाल यह था कि क्या नीतीश कुमार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर पाएंगे? इस बार उनकी पार्टी जनता दल-यूनाइटेड 101 सीटों पर चुनाव में उतरी थी। महागठबंधन शुरुआत में यह दबाव बनाने में कामयाब रहा कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया जा रहा है। नतीजतन, भाजपा के बड़े नेताओं ने बार-बार यह कहकर नीतीश के नेतृत्व पर मुहर लगा दी कि जीत के बाद तो वे ही विधायक दल के नेता चुने जाएंगे। बिहार में इस बार दो चरण में मतदान हुआ। पहले चरण में 6 नवंबर को 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान हुआ। कुल 65.08 फीसदी वोट पड़े। दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटें पर मतदान हुआ। कुल 69.20 फीसदी वोट पड़े। इस तरह दोनों चरणों को मिलाकर देखा जाए, तो इस बार कुल मतदान 67.13 फीसदी मतदान हुआ। यह सिर्फ एक सामान्य आंकड़ा नहीं है क्योंकि बिहार के अब तक के चुनाव इतिहास में इतना ज्यादा मतदान कभी नहीं हुआ।

चुनावी विश्लेषकों और चुनावी इतिहास के आंकड़ों पर गौर करें, तो यह सामान्य धारणा मानी जाती है कि ज्यादा मतदान यानी या तो सत्ता विरोधी लहर है, या फिर सत्ताधारी पार्टी या गठबंधन के पक्ष में एकतरफा मतदान हुआ है। नतीजे भी कुछ इसी तरह आए हैं। जदयू को पिछली बार 15.39 फीसदी वोट मिले थे। इस बार उसे 18 फीसदी से ज्यादा वोट मिलते दिख रहे हैं। यानी तीन फीसदी से ज्यादा का इजाफा जदयू के वोट बैंक में हुआ है। बढ़े हुए वोट प्रतिशत का नतीजों पर भी असर नजर आया। पिछले चुनाव में जदयू जहां तीसरे नंबर की पार्टी थी, इस बार उसे 30 से ज्यादा सीटों का फायदा हुआ है और वह राजद से भी आगे है।
मोदी-नीतीश की छवि
एनडीए इस बात को स्थापित करने में कामयाब रहा कि डबल इंजन वाली सरकार ही बिहार में विकास को गति दे सकती है। इसमें एनडीए को सबसे बड़ी मदद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि से मिली। एनडीए ने इन्हीं दो चेहरों को आगे रखकर चुनाव लड़ा। प्रधानमंत्री मोदी और चिराग पासवान की केमिस्ट्री की वजह से लोजपा (रामविलास) भी गठबंधन में मजबूती से खड़ी थी। एनडीए वोटरों के बीच यह धारणा बनाने में कामयाब रहा कि बिहार की जनता अब जंगलराज की दोबारा वापसी नहीं चाहती और सुशासन चाहती है। लालू-राबड़ी की सरकार के कार्यकाल से ‘जंगलराज’ शब्द किस तरह जुड़ा है, इसका असर तेजस्वी के प्रचार में भी दिखा। पूरे प्रचार के दौरान राजद ने कहीं भी लालू या राबड़ी की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं किया। पोस्टरों में अकेले तेजस्वी ही नजर आए।

महागठबंधन ने किए बड़े वादे पर नहीं बताया कहां से करेंगे
तेजस्वी ने हर घर सरकारी नौकरी, पेंशन, महिला सशक्तिकरण जैसे बड़े वादे किए, लेकिन फंडिंग और टाइमलाइन का ठोस प्लान जनता से साझा नहीं किया। ऐसे में ये दावे लोगों को हकीकत से अधिक हवा-हवाई लगने लगे। महागठबंधन के नेता बार-बार कहते रहे कि ब्लूप्रिंट आएगा, लेकिन चुनाव खत्म होने तक नहीं आ पाया। इससे राजद और महागठबंधन के नेताओं की विश्वसनीयता जनता की नजर में कम हुई। दूसरी ओर, एनडीए ने महागठबंधन के दावों को हवा-हवाई बताकर चुनावों के दौरान खूब भुनाया। नतीजा ये रहा कि वे अपने वोटरों को लामबंद करने में सफल रहे।
चिराग का जलवा
यह चुनाव जदयू प्रमुख नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दमदार जोड़ी के लिए याद किए जाएगा। हालांकि, इस चुनाव में एक युवा नेता ने भी खुद को स्थापित कर दिया है। वो नाम है चिराग पासवान। एनडीए में अपनी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के लिए 29 सीटें हासिल करने के लिए कड़ी मशक्कत करने के बाद चिराग पासवान ने 2 सीटों पर बढ़त बनाकर अपनी क्षमता साबित कर दी है। उनकी पार्टी का अभी स्ट्राइक रेट करीब 72% है।










