बजट सत्र के विस्तार के बाद बुलाए गए तीन दिवसीय विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में भारी राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिली। बृहस्पतिवार को शुरू हुए इस सत्र में सरकार ने तीन महत्वपूर्ण विधेयक संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम के कार्यान्वयन में तेजी लाना और लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना है। हालांकि, विपक्ष ने इन विधेयकों की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2023 में पारित हो चुका महिला आरक्षण बिल वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं की आड़ में देश के चुनावी मानचित्र को बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, परिसीमन से महिला सशक्तिकरण नहीं हो सकता। यह विधेयक ओबीसी भाई-बहनों को ताकत देने के बजाय एससी-एसटी के अधिकारों को छीनने की कोशिश है। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि मंशा साफ है तो पुराना बिल’ लाया जाए, विपक्ष उसे तुरंत पास कराएगा। राहुल गांधी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष को अपनी शक्ति में गिरावट का डर सता रहा है, इसलिए वे अगले 15 वर्षों तक जाति जनगणना और प्रतिनिधित्व के संबंध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
संघ के ढांचे के खिलाफ है यह बिल
परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को स्वर देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की यह योजना भारत संघ के ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विपक्ष दक्षिणी राज्यों, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम नहीं होने देगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहाकि सरकार जो कर रही है वह राष्ट्रविरोधी कृत्य से कम नहीं है। पूरा विपक्ष एकजुट होकर इसे हराएगा।
निशिकांत दुबे ने किया पलटवार
इससे पहले, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यदि महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को सरकार द्वारा अधिसूचित प्रारूप में लागू किया जाता है तो भाजपा इसे 543 सीटों के आधार पर कल से ही लागू करने को तैयार है। दुबे ने क्षेत्रीय राजनीति का दांव खेलते हुए कहाकि अगर मौजूदा स्वरूप में बदलाव होता है तो दक्षिणी राज्यों को सीटों का भारी नुकसान होगा और इसके लिए सीधे तौर पर राहुल गांधी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा जाति जनगणना का विरोध किया है। निशिकांत दुबे ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि उन्हें विपक्ष के नेता से माताओं-बहनों के हक में गंभीर बात सुनने की उम्मीद थी लेकिन उन्हें लगा जैसे उन्होंने माइकल जैक्सन का डांस देख लिया हो।
अखिलेश यादव ने उठाए जाति जनगणना पर सवाल
चर्चा के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार से पूछा कि देश में बहुप्रतीक्षित जाति जनगणना कब कराई जाएगी? उन्होंने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा यह आरक्षण अधूरा रहेगा।










