लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर बृहस्पतिवार को हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में भागीदारी देना समय की मांग है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी भी दी कि जो इस विधेयक का विरोध करेगा, उसे लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। प्रधानमंत्री जब सदन में इस विधेयक के समर्थन में बोल रहे थे, तभी समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने उन्हें बीच में टोका। इस पर प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, अखिलेश यादव मेरे मित्र हैं, इसलिए कभी-कभी मदद कर देते हैं। उनके इस हल्के-फुल्के जवाब पर सदन में ठहाके लगे और अखिलेश यादव भी मुस्कुराते नजर आए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा नया नहीं है बल्कि पिछले 25-30 वर्षों से इस पर चर्चा होती रही है। उन्होंने मुलायम सिंह यादव के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि तब से यह विषय उठता रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि इसे निर्णायक रूप से लागू किया जाए। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि इस विधेयक को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय राष्ट्रीय हित में समर्थन दें। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने सामाजिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान कराई। यह सही है कि मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं लेकिन मेरा दायित्व पूरे समाज को साथ लेकर चलना है। उन्होंने आगे कहा कि संविधान ने उन्हें यही मार्ग दिखाया है और उनके लिए संविधान सर्वोपरि है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत है कि एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति को देश की सेवा का अवसर मिलता है।
महिला आरक्षण विधेयक पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि यह देश के लोकतंत्र को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को जमीनी स्तर पर नेतृत्व का अवसर देना न केवल सामाजिक न्याय का सवाल है बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी यह समझदारी भरा कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 के चुनावों के दौरान सभी दलों की सहमति से यह मुद्दा पारित हुआ था इसलिए किसी को इसका नुकसान नहीं हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि अगर कोई इस विधेयक का विरोध करता है तो स्वाभाविक रूप से राजनीतिक लाभ उन्हें मिल सकता है लेकिन अगर सभी दल मिलकर इसे पास करते हैं तो इसका श्रेय पूरे देश को मिलेगा। उन्होंने विपक्ष को क्रेडिट का ब्लैंक चेक देने की बात कहते हुए कहा कि उन्हें व्यक्तिगत श्रेय नहीं चाहिए और वे चाहते हैं कि यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन दशकों में इस मुद्दे को लंबित रखकर देश ने एक तरह से अन्याय किया है और अब इसे सुधारने का समय है। यह पाप से मुक्ति पाने का अवसर है। सरकार द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र में इस विधेयक के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किए गए हैं, जिनमें संविधान संशोधन और परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करना है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि देश के जीवन में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जो भविष्य की दिशा तय करते हैं और यह वही क्षण है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे एकजुट होकर इस विधेयक को पारित करें, ताकि देश की महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके और लोकतंत्र और मजबूत हो सके।










