महिला आरक्षण को लागू करने और देश की चुनावी संरचना में बड़े बदलाव के उद्देश्य से लोकसभा में पेश किए गए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 ने संसद का माहौल गर्म कर दिया है। इन दोनों प्रमुख प्रस्तावों के साथ केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 भी पेश किया गया, लेकिन बहस का केंद्र महिला आरक्षण और परिसीमन ही है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को सदन में पेश किया। सरकार का कहना है कि इन कदमों के जरिए लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ होगा।
सरकार के अनुसार, पहले पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है। इससे आरक्षित सीटों की संख्या भी बढ़ेगी और महिलाओं को एक-तिहाई प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रस्ताव है कि लगभग 815 सीटों की नई संरचना में करीब 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। ये सीटें रोटेशन के आधार पर तय होंगी, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा।
परिसीमन बना विवाद की जड़
परिसीमन विधेयक के तहत निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर करने का प्रस्ताव है। यहीं से राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्ष का कहना है कि बिना नई जनगणना के परिसीमन करना उचित नहीं होगा और इससे राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने विधेयकों के पेश होने का विरोध करते हुए कहा कि सरकार इतने बड़े बदलावों को जल्दबाजी में ला रही है। उनका कहना था कि पहले नई जनगणना कराई जानी चाहिए और उसके बाद ही परिसीमन लागू किया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने उठाए जनगणना पर सवाल
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन जनगणना के बिना परिसीमन करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जाति जनगणना से बच रही है। जैसे ही जनगणना होगी जाति गणना की मांग उठेगी और उसके बाद आरक्षण की नई बहस शुरू होगी इसलिए सरकार जल्दी में है।
जनगणना शुरू : अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जनगणना की प्रक्रिया जारी है और जाति गणना भी कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले घरों की गिनती हो रही है और आगे नागरिकों की गणना के दौरान जाति से जुड़े आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य महिला आरक्षण को जल्द लागू करना है और इसके लिए आवश्यक संवैधानिक और प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं। अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में कहा कि यह देश के लिए ऐतिहासिक अवसर है, जब महिलाओं को राजनीति में समान भागीदारी देने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सीटों की संख्या बढ़ाने से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा और सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा।
विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे महिला आरक्षण का समर्थन करेंगे, लेकिन परिसीमन के मौजूदा स्वरूप का विरोध जारी रखेंगे। उनका कहना है कि नई जनगणना के बिना किया गया परिसीमन पारदर्शी और न्यायसंगत नहीं होगा। संसद के विस्तारित सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर तीखी बहस जारी रहने की संभावना है। सरकार इसे लोकतंत्र को मजबूत करने और महिलाओं को सशक्त बनाने का कदम बता रही है, जबकि विपक्ष प्रक्रिया और समय को लेकर सवाल उठा रहा है।










